अपने बच्चों की दीनि तालीम बचाएं, मकातिब का सहारा बनें: नज़रे आलम
अपने बच्चों की दीनि तालीम बचाएं, मकातिब का सहारा बनें: नज़रे आलम
मधुबनी संवाददाता WWमो सालिम आजाद
NR INDIA NEWS (26/04/2026)आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए जनता दल यूनाइटेड के नेता व ऑल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ के राष्ट्रीय अध्यक्ष नज़रे आलम ने कहा कि आज के दौर में एक बेहद अहम दीनि मसला, जिससे मुस्लिम समाज धीरे-धीरे दूर होता जा रहा है, वह है बुनियादी दीनि तालीम का निजाम।
उन्होंने कहा कि आज बड़े-बड़े प्लेटफॉर्म, तंजीमें और कुछ उलेमा आधुनिक शिक्षा और दुनियावी तरक्की पर इतना ज्यादा जोर दे रहे हैं कि नई पीढ़ी अनजाने में दीनि तालीम से दूर होती जा रही है। जबकि बड़ी तंजीमों और इदारों की अपनी अहमियत है, लेकिन यह भी सच है कि दीन की असली बुनियाद शुरुआती तालीम है, जो बच्चों को मकातिब और छोटे मदरसों में मिलती है।
उन्होंने बताया कि अलिफ, बा, ता से लेकर यस्सरनल कुरआन, नाज़िरा और हिफ्ज़-ए-कुरआन तक की तालीम गांवों और मोहल्लों के इन्हीं छोटे इदारों में दी जाती है। यही मकातिब बच्चों के दीनि मुस्तकबिल की बुनियाद रखते हैं। लेकिन अफसोस की बात है कि आज यही इदारे आर्थिक संकट, कमजोर बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। शिक्षकों को उचित मानदेय नहीं मिल रहा और न ही इन इदारों के पास व्यवस्थित ढंग से चलने के लिए जरूरी साधन हैं।
उन्होंने समाज की एक बड़ी कमी की ओर इशारा करते हुए कहा कि लोग नाम और दिखावे के लिए बड़ी-बड़ी तंजीमों और शख्सियतों पर खुलकर खर्च करते हैं, लेकिन जहां असली जरूरत है—यानी अपने इलाके के मकातिब और मदरसे—वहां ध्यान नहीं देते। यही वजह है कि मकातिब का निजाम कमजोर पड़ता जा रहा है, कई इदारे बंद हो चुके हैं और यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने सरकारी मदरसों की स्थिति पर भी चिंता जताते हुए कहा कि कई जगहों पर केवल वेतन लिया जा रहा है, जबकि तालीमी स्तर बहुत कमजोर है। ऐसे हालात में सबसे जरूरी है कि बुनियादी दीनि तालीम के निजाम को मजबूत किया जाए।
नज़र आलम ने जोर देकर कहा कि हर हाल में मकातिब और शुरुआती दीनि तालीम के इदारों को सहारा देना होगा, उनकी आर्थिक मदद करनी होगी और समाज में इसके प्रति जागरूकता फैलानी होगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस या आईपीएस जरूर बनाएं, लेकिन उससे पहले उन्हें दीन की बुनियादी तालीम जरूर दें।
उन्होंने कहा कि यह गलतफहमी दूर करने की जरूरत है कि दीनि तालीम हासिल करने वाले बच्चे आगे नहीं बढ़ सकते। हकीकत यह है कि कई हाफिज-ए-कुरआन और दीनि तालीम प्राप्त लोग आज उच्च शिक्षा और विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय स्थान हासिल कर रहे हैं।
अंत में उन्होंने कहा कि जब बच्चों की शुरुआत मजबूत दीनि बुनियाद पर होगी तो उनका ईमान भी मजबूत होगा, उनका चरित्र भी बेहतर होगा और वे सही रास्ते पर चलकर देश और समाज के लिए उपयोगी साबित होंगे। इसलिए जरूरी है कि हम इस मुद्दे को गंभीरता से लें और ठोस कदम उठाएं। यह केवल एक अपील नहीं, बल्कि एक सामूहिक जिम्मेदारी है—क्योंकि अगर आज हम नहीं जागे, तो आने वाली पीढ़ियों के सामने एक बड़ा मसला खड़ा हो जाएगा।
