फाईलेरिया की दवा के सेवन को लेकर जनमानस में बढ़ी जागरूकता /रिपोर्ट नसीम रब्बानी
फाईलेरिया की दवा के सेवन को लेकर जनमानस में बढ़ी जागरूकता /
रिपोर्ट नसीम रब्बानी
• लोग सहर्ष कर रहे हैं दवा का सेवन
• फाईलेरिया रोगी भी दवा सेवन को आ रहे आगे
• “पांच साल दवा का सेवन, फाईलेरिया मुक्त स्वस्थ जीवन”- डॉ. विनोद कुमार चौधरी
पटना/ 5 अक्टूबर- फाईलेरिया जिसे हाथीपावं रोग के नाम से भी जाना जाता है एक दर्दनाक रोग है जिसके कारण शरीर के अंगों में सूजन आ जाती है. यह क्यूलेक्स नामक मच्छर के काटने से फैलता है. आमतौर पर बचपन में होने वाला यह संक्रमण लसिका (लिम्फैटिक) प्रणाली को नुकसान पहुँचाता है. फाइलेरिया से जुडी विकलांगता जैसे लिंफोइडिमा( पैरों में सूजन) एवं हाइड्रोसील(अंडकोश की थैली में सूजन) के कारण पीड़ित लोगों को इसके कारण आजीविका एवं काम करने की क्षमता प्रभावित होती है. फाईलेरिया का संक्रमण पीड़ित व्यक्ति के लिए अभिशाप साबित होता है क्यूंकि समाज में इससे ग्रसित रोगी को हेय दृष्टि से देखा जाता है. सरकार एवं स्वास्थ्य विभाग फाईलेरिया से मुक्ति के लिए नियमित अंतराल पर एमडीए कार्यक्रम चलाकर लक्षित लोगों को दवा खिलाने की मुहीम चलाती है और अभी भी जिला में एमडीए कार्यक्रम चलाया जा रहा है.
लोग सहर्ष कर रहे हैं दवा का सेवन:
पटना के नासरीगंज क्षेत्र के 30 वर्षीय संटू कुमार जो जीविका के लिए कार्यालय एवं घरों में मिनरल वाटर पहुंचाने का काम करते हैं, बताया “मैंने सर्वजन दवा कार्यक्रम अभियान के अंतर्गत डीईसी और एल्बेनडाजोल दवा का सेवन किया है. मेरे घर आकर आशा दीदी ने मुझे अपने सामने दवा खिलवायी और बताया कि दवा सेवन से कोई हानि नहीं होती है और यह दवा ही मुझे फाईलेरिया के संक्रमण से बचा सकता है”.
61 वर्षीय गृहिणी बसंती देवी रामजी चौक, यादव टोला दानापुर की निवासी हैं और अपने बांया पैर में हाथीपांव से ग्रसित हैं. उन्होंने भी दवा कार्यक्रम अभियान के अंतर्गत डीईसी और एल्बेनडाजोल दवा का सेवन किया है. बसंती देवी ने बताया “फाईलेरिया रोगी होने का कारण मुझे कई तरह की शारीरिक तकलीफ से रोज गुजरना पड़ता है और मैंने दवा का सेवन इसलिए किया है कि मेरी तकलीफ थोड़ी कम हो सके”.
रामजी चौक, यादव टोला दानापुर के ही निवासी 70 वर्षीय राजेन्द्र साह एक चौकीदार के रूप में काम कर जीवनयापन करते हैं. उन्हें भी अपने बांया पैर में हाथीपांव की शिकायत है और चौकीदार के रूप में आजीविका चलाना उनके लिए चुनौती है. उन्होंने बताया “मेरे पैर में दर्द लगातार बढ़ रहा था इसलिए मैंने डीईसी और एल्बेनडाजोल दवा का सेवन किया है. मैं सभी से निवेदन करूँगा कि यह दवा जरुर खाएं और इस रोग से सुरक्षित रहने का प्रयास करें”.
“पांच साल दवा का सेवन, फाईलेरिया मुक्त स्वस्थ जीवन”- डॉ. विनोद कुमार चौधरी
जिला वेक्टर जनित रोग पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार चौधरी ने बताया, फाइलेरिया का इलाज समय पर नहीं शुरू होता है, तब यह बीमारी लाइलाज बन जाती है। इस बीमारी की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि संक्रमित होने के तीन से 15 साल बाद इसकी जनकारी होती है। ऐसे में लोगों को फाइलेरिया के लक्षणों की पहचान जरूरी है। यदि ज्यादा दिनों तक बुखार रहे, पुरुष के जननांग में या महिलाओं के स्तन में दर्द या सूजन रहे और खुजली हो, हाथ-पैर में भी सूजन या दर्द रहे तो यह फाइलेरिया होने के लक्षण हैं। तुरंत चिकित्सक से संपर्क कर उपचार शुरू करवाना सुनिश्चित करवाएं। डॉ. चौधरी ने बताया “पांच साल दवा का सेवन, फाईलेरिया मुक्त स्वस्थ जीवन” को सभी अपना मूलमंत्र समझें और पांच साल तक साल में एक बार एमडीए कार्यक्रम के तहत दवा का सेवन जरुर करें.
