वैशाली डीएम पर सात निश्चय योजना में गड़बड़ी छुपाने का लगा आरोप/रिपोर्ट अभिजीत कुमार
वैशाली डीएम पर सात निश्चय योजना में गड़बड़ी छुपाने का लगा आरोप
– मुख्य सचिव से की गई लिखित शिकायत
-शिकायतकर्ता रंजीत पंडित ने मुख्य सचिव को गड़बड़ी के सबूत भी दिए,
हाजीपुर, आरटीआई कार्यकर्ता रंजीत पंडित ने वैशाली डीएम के खिलाफ राज्य के मुख्य सचिव से मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना में गड़बड़ी करने की शिकायत की है। शिकायत में कहा गया है कि वैशाली जिलाधिकारी द्वारा जिला में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना में प्रयुक्त की जा रही सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच नहीं कराया जा रहा है। वरीय पदाधिकारियों के आदेश का भी अनुपालन नहीं किया जा रहा है। ऐसे में वित्तीय अनियमितता की उचित जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाए।
इसके लिए रंजीत पंडित ने पंचायती राज विभाग के लोक सूचना पदाधिकारी के पत्र का हवाला दिया है। जिसमें वैशाली जिला में योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रयुक्त की जा रही सामग्रियों की गुणवत्ता का जांच नहीं कराने की बातें कही गईं हैं। पत्र के अनुसार वैशाली जिला में मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना में प्रयुक्त की जा रही सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच का प्रतिवेदन विभाग को उपलब्ध नहीं कराया गया है।
रंजीत पंडित ने पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव अमृत लाल मीणा के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा कि इस आदेश के अनुसार योजना में प्रयुक्त की जा रही सामग्रियों की गुणवत्ता की जांच से संबंधित अनुपालन प्रतिवेदन 06-09-2019 तक भेजना था। पत्र के अंत में इसे अत्यावश्यक एवं महत्वपूर्ण कहा गया है, वही शिकायत में मुख्य सचिव के भी आदेश का उल्लेख किया गया है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि सामग्री की गुणवत्ता पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है।
आरटीआई एक्टिविस्ट रंजीत पंडित ने मुख्य सचिव के पत्र की चर्चा करते हुए कहा है कि कतिपय जगहों पर पीतल के नल एवं वाल्व नहीं लगाए गए हैं एवं कतिपय मामलों में स्टेजिंग में उपयोग की गई सामग्री गुणवत्तापूर्ण नहीं पायी गई है, जबकि मुख्य सचिव के पत्र के अंत में निर्देश दिया गया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन में समयबद्धता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाये। लेकिन योजनाओं के क्रियान्वयन में अभी तक गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं किया जा सका है। ऐसे में लोगों को पेयजल हेतु संचालित/गैर संचालित योजनाओं की मजबूती एवं लंबे समय तक शुद्ध पेयजल मिलने की संभावना पर संदेह है। उच्च पदाधिकारियों के दिशा-निर्देश का पालन नहीं करना अपने पद के दुरुपयोग को दर्शाता है। योजनाओं के क्रियान्वयन में अभी तक गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं किए जाने से वित्तीय अनियमितता का मामला जांच का बिंदु होता है।
संवाददाता अभिजीत कुमार देसरी प्रखंड
