कोविड काल में भी टीबी मरीजों का हो रहा है इलाज / रिपोर्ट नसीम रब्बानी
कोविड काल में भी टीबी मरीजों का हो रहा है इलाज / रिपोर्ट नसीम रब्बानी
– ठंड से बचें टीबी के मरीज
– बिना संकोच टीबी मरीज कराएं कोविड टीकाकरण
– कोविड टीके का कोई प्रतिकूल प्रभाव शरीर पर नहीं
मोतिहारी, 13 दिसम्बर।
पूर्वी चम्पारण जिला ने हमेशा से ही स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाई है। यहां कोविड काल मे भी टीबी के मरीजों का इलाज किया जा रहा है। पूर्वी चंपारण के सिविल सर्जन डॉ अंजनी कुमार का कहना है कि टीबी के रोगियों की स्वास्थ्य जाँच के लिए जिले में कई प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं। उन्होंने बताया कि मौसम में अब ठंड का प्रभाव देखा जा रहा है। ऐसे में इसका टीबी मरीजों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए टीबी मरीजों को ठंड से बचते हुए स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही
कोविड के खतरों से बचने के लिए टीकाकरण जरूर करवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोविड टीके का कोई प्रतिकूल प्रभाव शरीर पर नहीं होता है। इसलिए निःसंकोच होकर कोविड19 टीकाकरण करवाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि टीबी को क्षय रोग के नाम से भी जाना जाता है। यह कई मामलों में घातक संक्रामक बीमारी है जो आम तौर पर फेफड़ों पर हमला करता है। यह शरीर के अन्य भागों को भी प्रभावित कर सकता है। यह हवा के माध्यम से तब फैलता है, जब टीबी संक्रमण से ग्रसित व्यक्ति खांसी, छींक, या किसी अन्य प्रकार से हवा के माध्यम से अपना लार संचारित कर देते हैं। अगर बिना उपचार किये छोड़ दिया जाये तो ऐसे संक्रमित लोगों में से 50% से अधिक की मृत्यु हो जाती है।
कोविड-19 व्यवहार का पालन कर लगवाएं टीका:
सीएस ने कहा कि कोई भी टीबी रोगी इस भ्रांति का शिकार न हों कि उसको टीका लगने से कोई बुरा असर पड़ेगा। मास्क लगा कर टीबी रोगी टीकाकरण सत्र स्थल तक पहुंच सकते हैं और दो गज की दूरी का पालन करते हुए टीका लगवाना है। टीका लगवाने के बाद कुछ लोगों को हल्का बुखार और दर्द हो सकता है, जिससे बिल्कुल घबराना नहीं है। टीका लगवाने के बाद 30 मिनट तक टीकाकरण केंद्र पर ही ठहरना है। टीका केवल उन्हीं टीबी रोगियों को नहीं लगवाना चाहिए जिनको तेज बुखार है या फिर कोविड के लक्षण आ रहे हैं। टीकाकरण के बाद भी कोविड नियमों का सख्ती से पालन करना चाहिए।
– टीके की दोनों डोज लगवाएं टीबी के मरीज :
जिला यक्ष्मा पदाधिकारी पदाधिकारी डॉ रंजीत राय ने बताया – टीबी रोगियों को टीके की दोनों डोज लगवानी चाहिए। कोविड टीका पूरी तरह से सुरक्षित है। टीके की दोनों डोज आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि टीबी मरीज टीकाकरण के साथ ही मास्क जरूर लगवाएं। साथ ही अनावश्यक रूप से घर से न निकलें।
टीबी रोगी मास्क लगा कर धूल, मिट्टी, से बचें। हाथों को साबुन-पानी से बार-बार धुलते रहें या अल्कोहल बेस्ड सैनिटाइजर का प्रयोग करें। पौष्टिक खानपान पर जोर दें। दूध, अंडा, पनीर, सोयाबीन, हरी साग-सब्जियों और चिकित्सक के सुझाव के अनुसार भोज्य पदार्थों का सेवन करें।
सरकार द्वारा दी जाती है सहायता:
राज्य सरकार द्वारा टीबी मरीजों को पोषण के लिए निक्षय पोषण योजना के तहत इलाज के दौरान 500 रुपये उनके खाते में प्रति माह दिये जाते हैं। इस धनराशि का उपयोग पौष्टिक भोजन में ही करना है।
टीबी मरीज दें ध्यान:-
– ठंड से बचें,
– टीबी की दवा बंद न करें।
– मास्क जरूर पहनें, दो गज की दूरी और हाथों की स्वच्छता के लिए साबुन से हाथ धोते रहें।
