ग्रामीण कलाकारों ने दिखाया अपने कलाकारी का जलवा नाटक को देखने के लिए जमे रहे दर्शक, नाटक के भावनात्मक सीन को देखकर महिलाएं पोछती रही आंसू महुआ। नवनीत कुमार महुआ के चकफतेह में स्थानीय कलाकारों द्वारा सामाजिक नाटक अभागन बनी सुहागन का सफल मंचन किया गया। इस नाटक को देखने के लिए दर्शक भोर तक जमे रहे। नाटक में भावनात्मक सीन पर तो दर्शक आंखों से आंसू पोछते रहे। एक बेवा की दर्दनाक दृश्य देख महिलाएं फफक पड़ी। नाटक के जरिए कलाकारों ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार किया और दिखाया कि समाज में कैसे कैसे लोग हैं। जिनके कारण आज भी समाज पिछड़ेपन की ओर है। खासकर इस सामाजिक कुरीतियों में महिलाएं पीस रही है। लेखक के द्वारा इस नाटक में दिखाया गया कि एक बेवा महिला को घर बसाने का हक है और जब वह इसके लिए आगे बढ़ती है तो समाज उसे ऐसा करने नहीं देती। बाद में उसकी प्रताड़ना को देखकर द्रवित होते हुए एक युवक उसे मांग में सिंदूर भर कर अपनाता है। इस तरह अभागन सुहागन बनती है। इस नाटक में ग्रामीण चाटुकारों के साथ घर में बहू पर सास और ननद के होने वाले करतूत को भी दिखाया है। पूर्व पार्षद अशोक कुमार अकेला द्वारा लिखित इस नाटक में स्वयं अकेला ने बंजारा का भूमिका निभाया। जिवके भावनात्मक चीन को देखकर दर्शक भाव विहल होते रहे। हरिनारायण सिंह और मनोज सिंह के निर्देशन में स्थानीय कलाकारों ने अपनी कला के छाप छोरी। बेवा नारी गंगा की भूमिका में बिक्रम विक्रम थे। इसी तरह सौतेली मां मनोज पासवान, ढोंगी साधु विजय सिंह, नायक विकास वैशाली, सहनायक धर्मेन्द्र कुमार, पिता डां धर्मवीर सिंह, ननद विक्की, नालायक बेटा का रौल पंकज सिंह ने निभाया। मामा की भूमिका में शत्रुघ्न पासवान थे।उदघोषक सुशील कुमार, नृत्य निर्देशन सुबोध कुमार, मंच निर्देशन जय प्रकाश एवं रमेश कुमार, रूप सज्जा बच्चु सिंह, अरविंद सिंह व अवधेश सिंह का था। नाटक का उद्घाटन महुआ मुखिया संघ के प्रखंड अध्यक्ष जवाहर राय व पूर्व मुखिया वालेश्वर साह द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। नाटक को देखने के लिए काफी संख्या में महिलाएं पहुंची और उन्होंने अंत अंत तक कार्यक्रम को देखा। यहां ग्रामीण कलाकारों का विलुप्त हो रहे सामाजिक नाटक को कुछ युवा बरकरार रखे हैं। उनके द्वारा समय-समय पर सामाजिक चेतना से संबंधित नाटकों का प्रदर्शन किया जाता है।