April 18, 2026

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रेणुजी की रचनाएं गाँव की सोंधी मिट्टी की महक की तरह है : डाँ.पराशर

रेणुजी की रचनाएं गाँव की सोंधी मिट्टी की महक की तरह है : डाँ.पराशर

स्व.रमती देवी रामसुन्दर सिंह निकेतन मधुरापुर में रेणुजी की जयंती पखवाड़ा के मौके पर संगोष्ठी का आयोजन         रिपोर्ट राहुल गुप्ता

साहित्य की बदौलत ही हमारी संस्कृतियां एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक ढलती रहती है।यदि यह मृत हो जाए तो शायद हमारा व्यवहार पशुवत और दैत्यवत हो जाए।इसके लिए जरूरी है कि साहित्य और उसके सर्जक को अक्षुण्ण बनाये रखने और उसे समृद्ध बनाने की।हमें खुशी हो रही है कि शहर के कोलाहल से दूर इस सुदूर देहाती क्षेत्र में इस साहित्य को बचाये रखने की अनूठी परंपरा दो दशकों से चली आ रही है।चूँकि मेरी भी हिन्दी साहित्य में गहरी दिलचस्पी है।वास्तव में साहित्य और संस्कृति का वाहक है यह मधुरापुर स्थित स्वर्गीय रमती देवी रामसुन्दर सिंह निकेतन।साहित्यकारों की जयंतियां व पुण्य तिथियां मनाकर साहित्य के प्रति रुचि पैदा कर खासकर हिन्दी साहित्य में रचनायें करने को प्रेरित करने वाला यह निकेतन सचमुच प्रखंड में अद्वितीय है।उक्त बातें बीते रविवार को निकेतन में आयोजित रेणु जयंती पखवाड़ा के मौके पर शिरकत करते हुए वैशाली के विधायक सिद्धार्थ पटेल ने कही।समाजसेवी सुनिल कुमार सुमन के द्वारा व्यवस्थित कार्यक्रम में सन् चौहत्तर के जेपी आंदोलन के सिपाही रहे सेवानिवृत्त शिक्षक सह समाजसेवी सत्यनारायण सिंह ने जब साहित्य को जीवंत बनाये रखने वाली इस संस्था को राज्य सरकार से इसका निबंधन कराकर इसके अधीन एक विस्तृत लाईब्रेरी देने की मांग रखी तब उपस्थित लोगों ने इसका गर्मजोशी से स्वागत किया।मौके पर उपस्थित वरिष्ठ पत्रकार रामनाथ विद्रोही ने मांग का समर्थन करते हुए कहा कि माननीय विधायक द्वारा यदि ऐसा पुनीत कार्य किया जाता है तो वे उम्मीद करते हैं कि इस सुदूर देहाती क्षेत्र में कोई निराला या दिनकर या फिर बड़े साहित्यकार पैदा हो सकते हैं जिनकी कृतियां हिन्दी साहित्य को समृद्ध करने में सहायक होगा।जयंती पखवारा को संबोधित करती हुई कवियत्री डॉक्टर प्रतिभा पराशर ने कहा कि मुझे यहाँ आने से पहले ऐसा लग रहा था कि सुदूर देहाती क्षेत्र में साहित्यानुरागी होंगे क्या?लेकिन मेरा भ्रम यहाँ आकर टूट गया और विश्वास हो गया कि फणीश्वरनाथ रेणु भी तो ऐसे ही प्रांगण की उपज थे।गुदरी में लाल साबित रेणु ने अपनी साहित्य साधना से उस समय के बड़े-बड़े साहित्यकारों को चौंका दिया था।रेणु गांव की धरती से जुड़े कथाकार थे।उनकी रचनायें गांव की सोंधी मिट्टी की महक से महकती थी।बीआरपी धर्मेन्द्र कुमार की अध्यक्षता और उच्च माध्यमिक विद्यालय शंभूपुर कोआरी के हिन्दी शिक्षक अनिल कुमार के सफल संचालन में संचालित जयंती पखवारा में विषय प्रवेश शिक्षाविद वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने कराया था।पखवारा पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करने वालों में पूर्व सरपंच भगवान सिंह,प्रोफेसर वेदप्रकाश पटेल,पैक्स अध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह,दिनेश पटेल, चंद्रशेखर पटेल,बलवीर सिंह,मुकेश कुमार, शिक्षक सुमन कुमार,प्रेमशंकर साह,देशबंधु कुमार,रत्नेश कुमार,रवींद्र कुमार,ललन सिंह,सत्यनारायण सिंह,अरविंद कुमार,मनोज कुमार,राजकुमार सिह,सुरेश प्रसाद यादव, बालेश्वर सहनी,रामेश्वर सिंह सहित अन्य शामिल हैं।कार्यक्रम के अंत में विधायक श्री पटेल ने व्यवस्थापक सहित अन्य उपस्थित लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा कि वे इस संस्था को निबंधित करायेंगे तथा मुख्यमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना के तहत इस निकेतन को जोड़कर इसके अधीन एक बड़ी लाईब्रेरी प्रदान करेंगे। इसके लिए उन्होंने कोई सरकारी जमीन उपलब्ध करवाने की बात कही।लोगों ने उनकी इस घोषणा का स्वागत किया।मौके पर उपस्थित साहित्यकारों एवं साहित्यानुरागियो को सम्मानित भी किया गया था।

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