कर्नपुरा स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य शिविर में टीबी के संभावित मरीजों की हुई जांच
कर्नपुरा स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य शिविर में टीबी के संभावित मरीजों की हुई जांच 
– डॉक्टर फॉर यू की तरफ से लगाया गया था शिविर
वैशाली, 23 मार्च। विश्व यक्ष्मा दिवस के उपलक्ष्य पर बुधवार को हाजीपुर के कर्नपुरा स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जिसका नेतृत्व डाक्टर फॉर यू के वरिष्ठ सलाहकार एवं पूर्व जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ शिव कुमार रावत ने किया। डॉ रावत ने शिविर में आए संभावित टीबी के मरीजों की स्वास्थ्य जांच की व उनकी बलगम जांच हेतु कंटेनर उपलब्ध कराया, जिससे उनकी टीबी जांच संभव हो पाएगी। मौके पर डॉ रावत ने कहा कि टीबी पूर्णत : ठीक होने वाली बीमारी है पर जानकारी के अभाव में लोग इसके उपचार से वंचित रह जाते हैं। सही समय पर दवा शुरू कर दी जाए एवं संपूर्ण इलाज तक दवा लेने से टीबी पूर्णत: ठीक हो सकता है। बिना चिकित्सक की सलाह की दवा नहीं छोड़ें। जिससे कि एमडीआर मरीज पर नियंत्रण किया जा सके व सामान्य टीबी रोगी एमडीआर रोगी न बन सकें । शिविर मे प्रभारी चिकित्सक पदाधिकारी डॉ संजय दास एवं हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की चिकित्सक डॉ रेणु एवं अन्य चिकित्सक कर्मी सम्मिलित हुए। डाक्टर फॉर यू के जिला समन्वयक मुकेश कुमार,एमआईएस धर्मेंद्र कुमार ने टीबी के लक्षण ,जांच निःशुल्क दवा, डीबीटी की राशि एवं उचित भोजन लेने के बारे में विस्तृत जानकारी दी। शिविर मे डाक्टर फॉर यू के अन्य कर्मी दीपक कुमार, एवं टीबी असिस्टेंट सुरेश कुमार एवं एसटीएस रोहित कुमार सम्मिलित हुए। डॉ रावत ने कहा टीबी उन्मूलन कार्यक्रम जनांदोलन के रूप में मानकर सफल बनाया जा सकता है। जिससे कि सभी सरकारी गैरसरकारी एवं अन्य विभागों का सहयोग लेकर इस बीमारी पर विजय प्राप्त किया जा सकता है।
पहले जानें लक्षण:
खांसी आना
टीबी सबसे ज्यादा फेफड़ों को प्रभावित करती है, इसलिए शुरुआती लक्षण खांसी आना है। पहले तो सूखी खांसी आती लेकिन बाद में खांसी के साथ बलगम और खून भी आने लगता है। दो हफ्तों या उससे ज्यादा खांसी आए तो टीबी की जांच करा लेनी चाहिए।
पसीना आना-
पसीना आना टीबी होने का लक्षण है। मरीज को रात में सोते समय पसीना आता है। वहीं, मौसम चाहे जैसा भी हो रात को पसीना आता है। टीबी के मरीज को अधिक ठंड होने के बावजूद भी पसीना आता है।
बुखार रहना-
जिन लोगों को टीबी होती है, उन्हें लगातार बुखार रहता है। शुरुआत में लो-ग्रेड में बुखार रहता है लेकिन बाद संक्रमण ज्यादा फैलने पर बुखार तेज होता चला जाता है।
थकावट होना-
टीबी के मरीज की बीमारी से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। जिसके कारण उसकी ताकत कम होने लगती है। वहीं, मरीज के कम काम करने पर अधिक थकावट होने लगती है।
वजन घटना-
टीबी हो जाने के बाद लगातार वजन घटने लगता है। खानपान पर ध्यान देने के बाद भी वजन कम होता रहता है। वहीं, टीबी के मरीज की खाने को लेकर रुचि कम होने लगती है।
सांस लेने में परेशानी-
टीबी हो जाने पर खांसी आती है, जिसके कारण सांस लेने में परेशानी होती है। अधिक खांसी आने से सांस भी फूलने लगती है।
बचाव के तरीके-
1- 2 हफ्ते से ज्यादा खांसी होने पर डॉक्टर को दिखाएं। दवा का पूरा कोर्स लें। डॉक्टर से बिना पूछे दवा बंद न करे।
2- मास्क पहनें या हर बार खांसने या छींकने से पहले मुंह को पेपर नैपकिन से कवर करें।
3- मरीज किसी एक प्लास्टिक बैग में थूकें और उसमें फिनाइल डालकर अच्छी तरह बंद कर डस्टबिन में डाल दें। यहां-वहां नहीं थूकें।
4- मरीज हवादार और अच्छी रोशनी वाले कमरे में रहे। साथ ही एसी से परहेज करें।
5- पौष्टिक खाना खाएं, एक्सरसाइज व योग करें।
