बच्चों के शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वर्णप्राशन करवाएं – डॉ दिवाकर पाण्डे
बच्चों के शारीरिक मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्वर्णप्राशन करवाएं – डॉ दिवाकर पाण्डे
– 6 महीने से12 साल तक के बच्चों का हो सकता है स्वर्ण प्राशन
– रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ कई बीमारियों से बचाता है 
मोतिहारी,10 अप्रैल। आयुर्वेद में बच्चों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए स्वर्णप्राशन को बेहद फायेदमंद बताया गया है। मोतिहारी सदर प्रखंड अस्पताल में कार्यरत डॉ दिवाकर पाण्डे ने बताया कि जन्म के 6 महीने बाद से बच्चों का स्वर्णप्राशन करवाया जा सकता है। यह 12 वर्ष तक के बच्चों का भी हो सकता है। उन्होंने बताया कि रविवार को आयुर्वेद चिकित्सालय एवं न्यूरो पंचकर्म सेंटर हवाईअड्डा चौक छोटा बरियारपुर मोतिहारी में न्यायाधीश राजेंद्र चौबे के द्वारा स्वर्णप्राशन का दो बूंद दवा पिलाकर शुभारंभ किया गया। मौके पर डॉ दिवाकर पाण्डे द्वारा दवा के गुणधर्म की चर्चा के साथ 50 बच्चे को स्वर्णप्राशन कराया गया।
क्या है स्वर्णप्राशन-
डॉ पाण्डे ने बताया कि स्वर्णप्राशन संस्कार आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों में वर्णित ऐसी विधि है, जो प्राकृतिक तरीके से बच्चों में स्वास्थ्य एंव बुद्धिमता प्रदान करती है। स्वर्णप्राशन का मतलब है, स्वर्ण को शहद, घी के साथ या अन्य द्रव्यों के साथ बच्चों को देना है। स्वर्णप्राशन बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए की जाने वाली एक विधि है। उन्होंने बताया कि स्वर्णप्राशन को हमेशा सुबह खाली पेट करना चाहिए। इसका खाली पेट सेवन करना सर्वोत्तम माना जाता है।
स्वर्णप्राशन के फायदे-
आयुर्वेद में स्वर्णप्राशन का उपयोग बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए ही किया जाता है।
बच्चों की इम्युनिटी बढ़ाने के लिए इसे लगातार 6 महीने तक किया जा सकता है। इसमें बच्चों को कुछ ऐसे चीजों का सेवन करवाया जाता, जिससे उनका विकास तेजी से होता है। आप भी अपने बच्चे का शारीरिक और मानसिक विकास तेज करने के लिए स्वर्णप्राशन का इस्तेमाल कर सकते हैं। आयुर्वेद में अक्सर बच्चों के बेहतर विकास के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
ताकतवर बनाता है स्वर्णप्राशन-
स्वर्णप्राशन में स्वर्णभस्म के साथ ही शहद और घी का भी इस्तेमाल किया जाता है। जो बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाकर उन्हें ताकतवर बनाता है। स्वर्णप्राशन लेने वाले बच्चे निरोगी होते हैं। दरअसल, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता होने पर ही बच्चे या बड़े बीमार होते हैं। लेकिन स्वर्ण प्राशन लेने वाले बच्चों की इम्युनिटी मजबूत होती जिससे वे निरोगी रहते हैं।
कितने समय के अंतराल में करवाएं स्वर्णप्राशन-
डॉ दिवाकर पांडे का कहना है कि स्वर्णप्राशन को प्रतिदिन भी दिया जा सकता है। लेकिन भोजन या पाचन की अच्छी ऋतु यानी शरद ऋतु में इसे रोजाना किया जा सकता है। गर्मी के मौसम में इसे डॉक्टर की सलाह पर ले सकते हैं। अगर कोई बच्चा किसी गंभीर बीमारी से ठीक हुआ है, तो वे उसे प्रतिदिन दिया जा सकता। जिससे बच्चा दोबारा बीमार न पड़ें। साथ ही डॉक्टर बच्चे की स्वास्थ्य स्थिति को देखकर ही बताते हैं कि उसे कितने दिन के अंतराल में देना चाहिए। बच्चे को सर्दी, खांसी, जुकाम और बुखार होने पर स्वर्णप्राशन नहीं करवाना चाहिए।
मौके पर न्यायाधीश राजेंद्र चौबे, एसीजेएम ब्रजेश त्रिपाठी, डॉ नवीन कुमार दास, डॉ सच्चिदानंद पटेल, पृथ्वी कनौजिया, रजनीश कुमार सहित कई लोग उपस्थित थे।
