भ्रष्टाचार में डूबा संपतचक अंचल अधिकारी नंदकिशोर निराला
भ्रष्टाचार में डूबा संपतचक अंचल अधिकारी नंदकिशोर निराला

पद का दुरुपयोग:सीओ संपतचक की मनमानी।
पटना संपतचक :जिस आवेदन में 15 बार गड़बड़ी बताकर खारिज किया, उसे ही अंचलाधिकारी ने दे दी स्वीकृति
संपतचक के सीओ संपतचक अंचलाधिकारी नंदकिशोर निराला अपनी कार्रवाई से चर्चा में हैं। उनके कार्यकाल में दाखिल खारिज के पंद्रह बार खारिज किये गए आवेदन को स्वीकृत कर जमीन को खतियानी बना देने का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जिसमें सीओ उक्त मामले में किसान को गालियां बकते सुने गए थे।
जमीन के मामलों में लाल अफसरशाही पर लगाम लगाने व भ्रष्टाचार खत्म करने की नियत से सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियमों में अपेक्षित बदलाव किए। इसके तहत दाखिल खारीज से लेकर लगान की रसीद कटाने समेत दस्तावेजों को ऑन लाइन किए गए। अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए आरटीपीएस के तहत विभिन्न कार्याें की समयावधि निर्धारित की गई। लेकिन पारदर्शिता की दवा जैसे-जैसे की गई, मर्ज उसी तरह बढ़ते गए। दाखिल खारीज हो अथवा जमीनी विवाद से संबंधित अन्य मामले पदाधिकारियों की कार्रवाई पर अंगुलियां उठती रहीं। हालांकि आम जनों को न तो कोई सहूलियत हुई और न ही भ्रष्टाचार पर अंकुश लग पाया।
ऐसा ही मामला संपतचक प्रखंड के मामले उजागर हुआ है।
पंद्रह बार कर चुके थे अस्वीकृत : इस मामले में पहले पंद्रह वाद हुए हैं। जिसे राजस्व कर्मचारी की रिपोर्ट के आधार पर सीओ द्वारा अस्वीकृत किया गया है।
मामला विवादित बता लौटाया
दाखिल खारिज के उक्त मामले से संबंधित अलग-अलग आवेदन आये लेकिन ऑफलाइन में बिबाद बता कर अंचलाधिकारी द्वारा पल्ला झार दिया गया। सबसे बडी बात यह है कि जिस आबेदन और रजिस्टर 2 को गलत ठहराया गया बस उसी दौरान ऑनलाइन में सही कर ऑनलाइन कर दिया गया। मामला संगठित प्रतीत होता है जिन्हें अंचल कार्यालय द्वारा विभिन्न गड़बड़ियों के कारण वेतन पर रोक लगा दिया गया था। निरस्त किए गए थे।
न्यायालय में विचाराधीन है मामला
उक्त जमीन के विवाद से संबंधित मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है। जिसे अस्वीकृत एबं स्वीकृत का कारण भी बताया गया है। लेकिन बाद में अंचलाधिकारी संपतचक द्वारा उसे नजरअंदाज करते हुए दूसरे पक्ष द्वारा अनापत्ति के अभाव का हवाला देकर नामांतरण की अनुशंसा की गई है।
सीओ ने कहा; कर्मचारी की रिपोर्ट के अधार पर हुआ है सारा कार्य
कर्मचारी जो रिपोर्ट तैयार करते हैं। उसी के आधार पर दाखिल खारिज होता है। जब कर्मचारी या सीआई बेहतर रिपोर्ट देते हैं तो स्वीकृति दी जाती है। इस केस में भी ऐसा ही किया गया हो गॉ।
