मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हकारों के दिन बहुरे, लग्जरी गाड़ियां लगाकर भी लोग खरीद रहे देसी फ्रिज के नाम से प्रचलित मिट्टी की घड़े और सुराही
मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हकारों के दिन बहुरे, लग्जरी गाड़ियां लगाकर भी लोग खरीद रहे देसी फ्रिज के नाम से प्रचलित मिट्टी की घड़े और सुराही
आधुनिक युग में आज भी कायम है मिट्टी के बर्तनों की विसात
महुआ, नवनीत कुमार। गर्मी और तपिश बढ़ने के साथ ही मिट्टी की बनी घड़े और सुराही (देसी कूलर) की मांग बढने लगी है। लोग इस आधुनिक युग में भी इसकी खरीदारी जमकर कर रहे हैं। इस गर्मी में अधिकतर ग्रामीण परिवारों के लोग पीने के पानी को रखने के लिए मिट्टी के बने घड़े या सुराही का ही उपयोग करते हैं। यहां तक कि इस मौसम में बड़े-बड़े परिवारों में भी शौकिया लोग घड़े और सुराही का उपयोग करना नहीं भूले हैं।
महुआ सहित विभिन्न बाजारों में विभिन्न जगहों पर मिट्टी की बनी बर्तनों घड़े और सुराही की दुकानें खुल गई है। वहां लग्जरी गाड़ियां लगती है और उससे लोग उससे उतरकर देशी फ्रिज की खरीदारी करते हैं। बड़े-बड़े परिवारों के शौकिया लोग भी इस मौसम घड़े या सुराही में पानी रखकर पीना पसंद करते हैं। लोगों का कहना है कि मिट्टी की सुराही में पानी रखने से उसका स्वाद अच्छा हो जाता है। इतना ही नहीं मिट्टी के बर्तन में पानी विशुद्ध भी हो जाता है। घड़े और सुराही की खरीदारी कर रहे लोगों ने बताया कि फ्रिज में पानी रखकर लोग ठंडा तो कर लेते हैं लेकिन वह कृत्रिम होता है। जबकि मिट्टी की बर्तण घड़े या सुराही में पानी रखकर पीने से ठंडक भी मिलती है जिससे गला तर होता है और वह विशुद्ध होता है। गर्मी और तपिश में मिट्टी के बर्तन का पानी पीने से पेट का विकार भी दूर होता है। जबकि फ्रिज का ठंडा पानी पीने से इसका प्रतिकूल असर पड़ता है और वह बीमारी को जन्म भी देता है।
सुराही और घड़े की मांग बढ़ने से कुम्हारों परिवार में बढ़ी आय की स्रोत:
इस समय मिट्टी की बने घड़े और सुराही की मांग बढ़ने से कुम्हार परिवार में आय का स्रोत भी बढा है और उनमें खुशी हैं। कुमारों ने पूछने पर बताया कि उनके यहां इस समय लग्जरी गाड़ियां लगाकर भी लोग घरे और चौड़ाई की खरीदारी कर रहे हैं खासकर बड़े परिवार के लोग सोफिया के तौर पर इसकी खरीदारी करते हैं पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार इसकी मांग अधिक है। 2 साल से कोरोना काल होने के कारण लोग ठंडा पानी पीने से भाग रहे थे। इनसे इसकी बिक्री मंद पड़ गई थी। उनके रोजगार बिल्कुल बंद हो गए थे। वे अपने खानदानी कामों को छोड़कर किसानों के खेतों में मजदूरी कर रहे थे। मजदूरी से घर नहीं चल रहा था और घरों में फाकाकशी हो गई थी। इस बार इसकी मांग बढ़ने से उनके भाग्य चमके हैं। कुम्हारों का कहना है कि मिट्टी के सुराही या घड़े में पानी रखने से मिठास आती है। इधर लोगों का भी कहना है कि यह ना सिर्फ मध्यम और गरीब वर्ग बल्कि अच्छे-अच्छे परिवारों के लिए फ्रिज का काम करता है। इसे लोग देसी फ्रिज कहते हैं। देशी फ्रिज मिट्टी की बनी बर्तनों के विसात आज भी कायम है।
