7 दिवसीय महायज्ञ में किए जा रहे वेद मंत्रों से गूंज रहा इलाका, मंगलवार को होगा महायज्ञ का विधिवत समापन
7 दिवसीय महायज्ञ में किए जा रहे वेद मंत्रों से गूंज रहा इलाका, मंगलवार को होगा महायज्ञ का विधिवत समापन
महुआ, नवनीत कुमार
महुआ थाने के नारायणपुर बेलकुंडा धानेपट्टी मठ पर चल रहे श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के छठे दिन सोमवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यज्ञ में आचार्यों द्वारा किए जा रहे वेद मंत्रों के जाप से इलाका गुंजायमान है। यज्ञ मंडप की परिक्रमा के लिए भीड़ उमड़ रही है। यहां यज्ञ में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पूरा ख्याल रखा जा रहा है। देवी देवताओं को पूजन के लिए महिलाओं की भीड़ अधिक हो रही है।
यज्ञ में श्रद्धालुओं के बीच प्रवचन का रसपान कराते हुए संतों द्वारा बताया गया कि श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ का अनुष्ठान कराने से क्षेत्र में समृद्धि आती है। माता लक्ष्मी और स्वयं नारायण अन्न-धन के देवता है। उनकी कृपा से ही मानव जीवन में सुख समृद्धि के साथ शांति, सद्भाव और प्रेमभाव होता है।
ग्रामीण इलाके में लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के अनुष्ठान से किसानों के खेत खलिहान अन्न धन से भरते हैं। मंगलवार तक चलने वाले इस महायज्ञ में श्रद्धालुओं के लिए भंडारा भी चल रहा है। साथ ही रासलीला, प्रवचन के साथ झूला, सर्कस, जादूगर, खेल तमाशे का भी दर्शक लुत्फ श्रद्धालु उठा रहे हैं। यज्ञ कमेटी के अध्यक्ष अमरेश सिंह, कोषाध्यक्ष रजनीश कुमार, नवीन कुमार चुन्नू, राजेश कुमार, सुनील कुमार पिंटू , प्रियेश कुमार, रौशन ठाकुर, मोनिटरिंग कमिटी के कुमार सौरभ, गुंजा कुमारी, मनीष कुमार, नितेश कुमार आदि ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और उनकी सुरक्षा को लेकर पूरी व्यवस्था की गई है। पानी, शरबत, चाय आदि से लेकर ठहरने का भी प्रबंध किया गया था। यहां शाम होने के साथ यज्ञ परिसर श्रद्धालुओं की भीड़ से गुलजार हो उठता है। रात को तो चकाचौंध रौशनी से यज्ञ परिसर जगमग हो उठता है। यहां दूर-दूर से श्रद्धालु यज्ञ देवता को पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। यज्ञ में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में महिलाओं की संख्या अधिक है। लोगों ने बताया कि यहां यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने के लिए सुबह में अधिक भीड़ हो जाती है। वही शाम ढलने के बाद मेला दर्शकों और श्रद्धालुओं की भीड़ से यज्ञ परिसर गुलजार हो उठता है। ग्रामीणों का पूर्ण सहयोग इस यज्ञ में मिल रहा है। मंगलवार को विधि विधान के साथ देवी देवताओं के जयघोष के बीच इस यज्ञ की पूर्णाहुति की जाएगी।
