भारत में सरकार के ग़लत नितियों के खिलाफ, आवाज बुलंद करने कि आजादी नहीं है:मक़बूल अहमद।
भारत में सरकार के ग़लत नितियों के खिलाफ, आवाज बुलंद करने कि आजादी नहीं है:मक़बूल अहमद। रिपोर्ट नसीम रब्बानी वैशाली: राजद नेता पातेपुर प्रखण्ड अध्यक्ष युवा शायर मकबूल अहमद अंसारी ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है कि, आज आज़ाद भारत में हमें सरकार के ग़लत नितियों के खिलाफ आवाज बुलंद करने कि आजादी नहीं है किसान अगर क्रिसी कानून के खिलाफ आवाज उठाती है तो उसे खालिस्तानी कहा जाता है। एन आर सी सी ए ए के खिलाफ अगर कोई आवाज बुलंद करता है तो देशद्रोही कहा जाता है। स्कूल शिक्षा के साथ हो रहे भेदभाव और ग़लत पालिसी के खिलाफ छात्र आवाज उठाती है तो छात्रों के साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार एवं छात्रहित के विपरीत सरकार ने जो दुस्साहस कर उस पे लाठी चार्ज करवाया गया है वह किसी अपराध से कम नहीं है इन सारे मुद्दों पर महागठबंधन ने 7 अगस्त 22 को आक्रोश मार्च पुरे भारत के जिला मुख्यालय पर निकालने का निर्णय लिया है महागठबंधन के हमारे सभी साथियों ने वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर रामशीष चौक पर 10/बजे दिन में राजद के लोकप्रिय जिला अध्यक्ष वैधनाथ सिंह चंद्रवंशी जी कि अध्यक्षता में विशाल जन आक्रोश मार्च निकाला जा रहा है आप सभी साथियों से निवेदन है कि सह समय पर उपस्थित हों।
आज भाजपा सरकार और उनके नेता जगह जगह हिन्दू मुस्लिम तो मन्दिर मस्जिद तो अज़ान नमाज में आम जनता को उलझाकर असल मुद्दे से जनता को भटका रही है और इस नाकामी गतिविधियां में संलिप्त हैं आज जिस एस टी, कमरतोड़ मंहगाई, बेरोजगार युवाओं को रोजगार,
RRB – NTPC तो एक झांकी है पूरे देश को निजीकरण की आग में धकेलना ही भाजपा की असल रणनीति है।
श्री अंसारी ने यह भी कहा है कि भारत, न तो अमेरिका, है नहीं जापान, और न जर्मनी, इसलिए यहां निजीकरण एवं पूंजीवादी व्यवस्था पूर्णतः लागू करने का अर्थ है गृह युद्ध को बुलावा देना, भारत के वर्तमान सरकार की निजीकरण के सापेक्ष नीतियों से देश एवं समाज के अंतिम पंक्ति के युवा भयंकर बेरोजगारी एवं भुखमरी का शिकार होंगे।
अगर देश के युवा आज भी न जागे तो वह दिन दूर नहीं जब देश के विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय निजी हाथों में चले जायेंगे और फिर देश का गरीब तबका उन विश्वविद्यालय सहित संस्थानों में शिक्षा प्राप्त नहीं कर पायेगा।
भारत जैसे विशाल जनसंख्या घनत्व वाले राष्ट्र में पूंजीवादी व्यवस्था को पूर्णतः लागू करने का प्रयास करने वाले ये भूल गए कि यह जेपी एवं गांधी की धरती है, जिस दिन जनता जागी उस दिन सत्ता तो दूर की बात है, कार्यकर्ताओं के लाले पड़ जाएंगे।
