हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भाई बहन के निश्छल प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन ।
हर्षोल्लास के साथ मनाया गया भाई बहन के निश्छल प्रेम का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन ।। रिपोर्ट सुधीर मालाकार । हाजीपुर (वैशाली) कुछ जगहों को छोड़ अधिकांश जगहों पर भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षा का वचन देने वाला पर्व रक्षाबंधन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। ज्योतिष एवं पंडितों के मतमतांतर के कारण कुछ जगहों पर कल सुबह रक्षाबंधन का त्यौहार मनाया जाएगा ।पंडितों के कारण भद्रा नक्षत्र को बताते हुए किसी ने इसे लाभकारी बताया तो किसी ने विनाशकारी। जिसके कारण कुछ जगहों पर शुक्रवार की सुबह रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा ।एक दिन या दो दिन लेकिन यह भारतीय संस्कृति में बड़ा ही अनूठा और पवित्र पर्व माना गया है ,जिसमें बहने भाई की सलामती की दुआ करती है ,वही बहन को आजीवन रक्षा का वचन भाई द्वारा दिया जाता है ।बचपन में जो भाई-बहन आपस में लड़ाई झगड़ा किया करते हैं, एक दूसरे से फूला फूली भी करते हैं ,लेकिन जितना अपनत्व भाई बहनों में देखा जाता है ,वह अन्यत्र दुर्लभ है। हां भाई भाई में किसी बात के लिए लंबे समय तक मनमुटाव चलता है, लेकिन बहनों के प्रति आदर, सम्मान ,श्रद्धा का भाव हमेशा से बना हुआ है । इतिहास साक्षी है, जब शिशुपाल का वध करते समय श्री कृष्ण का उंगली कट गई थी ,उस समय द्रौपदी ने अपने आंचल को फारकर श्री कृष्ण की उंगली की पट्टी बांधी थी ,जिससे श्री कृष्ण द्रौपदी को आजीवन रक्षा का वचन दिया था । जब दुशासन ने द्रौपदी को निर्वस्त्र करना चाहा ,उस समय मधुसूदन ने अपने दिए गए वचन के अनुसार द्रौपदी की निर्वस्त्र होने से बचाया था । कहा जाता है उदयपुर की महारानी कर्णावती ने भी विपत्ति के समय मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेज कर एक भाई के रूप में बहन की रक्षा की गुहार लगाई थी ।ऐसे अनेकों दृष्टांत देखने को मिलता है ,जहां भाई-बहन के प्रति समर्पण का भाव आज भी अमर है, लेकिन आज के इस समाज में कुछ दुष्ट प्रवृत्ति के लोग बहनों के प्रति कुदृष्टि भी रखते हैं ।ऐसे दुष्टों से हमेशा सावधान रहने की आवश्यकता है।
