सिर्फ ऑक्सीजन का स्तर कम होने पर कोरोना का भ्रम न पालें
– अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से भी होती है ऑक्सीजन की कमी – संदेह होने पर अवश्य कराएं कोरोना की जांच
सीतामढ़ी।26 अप्रैल जब से देश में कोरोना की दूसरी लहर आयी है। ऑक्सीजन के घटते स्तर के लिए कोरोना को जिम्मेवार ठहराया जा रहा है। हर दूसरा व्यक्ति बाजार से बिना गुणवत्ता की जांच किए ऑक्सीमीटर से अपने ऑक्सीजन का स्तर जांच रहा है। थोड़ा भी कम आने पर वह या तो पैनिक हो जाता है या कोरोना की आशंकाओं से ग्रसित। इस संबंध में डेडिकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेंटर में कार्यरत डॉ पूनम कुमार कहती हैं कि ऑक्सीजन का लेवल कम होने का मतलब सिर्फ कोरोना का लक्षण नहीं है। अक्सर ही हम बुजुर्गों , बच्चों,गर्भवती महिलाओं और अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों में भी ऑक्सीजन स्तर में कमी पायी जाती है। अगर आपको संदेह हो तो कोरोना जांच कराकर अपनी शंका को मिटा सकते हैं। पल्स ऑक्सीमीटर ऑक्सीजन के सैचुरेशन स्तर को मापता है। जो स्वस्थ व्यक्ति में 94 से 100 के बीच में रहता है।
ऑक्सीजन की कमी होने पर चेहरे और होठों के रंगों पर पड़ता है प्रभाव डब्ल्यूएचओ के अनुसार सभी कोरोना के सामान्य लक्षण तो जानते है, पर कोराना पॉजीटीव होने पर अगर आपके खून में ऑक्सीन का स्तर कम होती है तो उसका सीधा प्रभाव चेहरे या होठों पर देखा जा सकता है। स्किन या होठों का अचानक से नीला पड़ जाना स्यानोसिस की पहचान है। हेल्दी ऑक्सीजेनेटेड ब्ल्ड से हमारी त्वचा और होंठ को लाल या गुलाबी ग्लो मिलता है।
ऑक्सीजन की कमी से छाती और फेफड़ों में दर्द डॉ पूनम कहती हैं कोरोना के इस म्यूटेंट में लोगों के बीच ऑक्सीजन के स्तर में अचानक कमी देखी गयी है। अभी डेडिकेटेड कोविड हेल्थ केयर सेंटर में 21 लोग भर्ती है। लगभग सभी में ऑक्सीजन की कमी देखी गयी है। जबकि पिछली बार के मरीजों में ऑक्सीजन की उतनी कमी नहीं देखी गयी थी। ऑक्सीजन की कमी से संक्रमितों को सीने में दवाब, लगातार खांसी, बैचेनी और बहुत तेज सिरदर्द होता है। इसलिए बेहतर है कि हम शारीरिक कार्य करते रहें और कोविड के नियमों का पालन करें। वहीं योग के कुछ आसनों जिसमें पेट के बल सोकर हम अपने शरीर के ऑक्सीजन के स्तर को सामान्य बना सकते हैं। सामान्य रूप से यदि ऑक्सीजन की कमी महसूस हो या ऑक्सीजन का लेवल 94 से कम जाए तो मरीज को पेट के बल सोना चाहिए, जिसे प्रोनिंग कहा जाता है. सोते समय एक तकिया गर्दन के नीचे, 2 तकिया छाती के नीचे एवं 2 तकिया टखने के नीचे रखें. इस तरह कोशिश करें कि जितना अधिक से अधिक समय पेट के बल सोया जाए. इससे शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है.