गोबिंदपुर सिंघाड़ा वाली मईया का पट खुलते ही उमरी श्रद्धालुओ की जनसैलाब।
गोबिंदपुर सिंघाड़ा वाली मईया का पट खुलते ही उमरी श्रद्धालुओ की जनसैलाब। रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
महुआ(वैशाली ) प्रखंड क्षेत्र के गोबिंदपुर सिंघाड़ा स्थित उत्तर बिहार की शक्तिपीठ मनोकामना सिद्धि देवी मंदिर में पंचमी तिथि के मौके पर दो बकरों की बलि के साथ ही मां भगवती का पट श्रद्धालुओं की दर्शन के लिय खोल दी गई।इस अवसर पर मां की दर्शन को लेकर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी ।
मिली जानकारी के अनुसार बलि प्रथा के लिए वैशाली के साथ ही आसपास के जिलों में चर्चित प्रसिद्ध शक्तिपीठ गोविंदपुर सिंघाड़ा में शुक्रवार की रात्रि 9:30 बजे के करीब पंचमी तिथि होने के नाते दो बकरों की बलि एवं छप्पन प्रकार के भोग के साथ ही मां भगवती का पट श्रद्धालु भक्तों के लिए खुल गया । पट खुलते ही लोगों द्वारा लगाये गये जयकारा से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया, इसके साथ ही मंदिर परिसर के ईर्द गिर्द में पांच दिवसीय भव्य मेला का भी विधिवत शुभारंभ हो गया। विदित हो की 300 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार शक्तिपीठ गोविंदपुर सिंघाड़ा में पूरे विधि विधान के साथ मां भगवती की पूजा अर्चना होती आ रही है।भगवती शक्तिपीठ कई मायनों में वैशाली के साथ ही समस्तीपुर,मुजफ्फरपुर,दरभंगा,सारण,पटना,बेगूसराय आदि जिलों में चर्चित है।यह स्थान खास तौर पर मनोकामना सिद्धि तथा बकरों की बलि के लिय काफी प्रसिद्ध है।यह परंपरा सदियों से चलती आ रही है।पूजा समिति के आयोजक मोहन सिंह , सोहन सिंह , गुलाब सिंह ,संजय सिंह , सनोज कुमार , बबलू सिंह, टंटु सिंह,संजय सिंह मुन्ना के साथ ही ग्रामीण प्रदीप कुमार सोनी,पत्रकार अभिषेक शुक्ला, शंभू सदाशिव,नरेश राम, डॉ कामेश्वर प्रसाद गुप्ता , वीरेंद्र सिंह , टंटू सिंह,प्रो धर्मेंद्र सिंह, विनोद गुप्ता आदि ने बताया कि यहां पूरे विधि विधान के साथ मां भगवती की पूजा अर्चना की जाती है।इसमें कहीं भी कोई परिवर्तन नहीं किया जाता है ।मां का पट खुलने के साथ ही बलि प्रथा प्रारंभ हो जाती है जो नवमी तिथि तक चलती है।दसवीं के दिन मां के अंतिम पूजा अर्चना वाया नदी के तट पर स्थित नरसिंह स्थान सिंघाड़ा में की जाती है ।इसके बाद मां की प्रतिमा का विसर्जन भी नदी में कर दिया जाता है।विसर्जन के दौरान जन सैलाब उमड़ जाती है,जिस कारण पूरा इलाका सुबह से देर शाम तक अस्त व्यस्त हो जाता है।
