पूरे 9 दिनों तक विधि विधान के साथ होती है माता की पूजा सुबह शाम आरती के लिए जुटती है श्रद्धालुओं की भीड़
पूरे 9 दिनों तक विधि विधान के साथ होती है माता की पूजा
सुबह शाम आरती के लिए जुटती है श्रद्धालुओं की भीड़
महुआ, नवनीत कुमार
महुआ बाजार से 4 किलोमीटर दक्षिण हाजीपुर-महुआ मार्ग पर कन्हौली गांधी स्मारक दुर्गा पूजा मन्नत सिद्धि के लिए प्रसिद्ध है। यहां माता के समक्ष जो भी श्रद्धालु सच्चे हृदय से कुछ मांगते हैं। उनकी मनोकामना पूर्ण होती है। यहां आश्विन शुक्ल पक्ष सप्तमी को माता का पट खुलते ही भक्ति सिर चढ़कर बोलने लगती हैं।
यहां पर स्वप्न में आए माता ने मूर्ति स्थापना कर पूजन करने के लिए लोगों को जगाया था। तब से यहां शारदीय नवरात्र ही नहीं बल्कि वासंती नवरात्र पर भी माता की भव्य प्रतिमा बनाकर पूजन होते आ रही है। शारदीय नवरात्र पर तो भक्ति लोगों में सिर चढ़कर बोलती है। कलश स्थापना के साथ यहां श्रद्धालु सुबह शाम आरती में पहुंचते हैं और माता का चरण वंदन करते हैं। लोगों का कहना है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से माता को पुकारता है और कुछ मांगता है उसे मनोकामना पूर्ण होती है। यहां पर महिला श्रद्धालुओं की भीड़ सबसे अधिक होती है। महिलाएं शिफ्ट बार माता को पूजन के लिए उनके स्थल क्षेत्र में पहुंचती है। ताकि किसी तरह का अफरा-तफरी नहीं हो। यहां कमेटी के द्वारा श्रद्धालुओं का विशेष ख्याल रखा जाता है।
दिव्य होता है माता का रूप:
कन्हौली गांधी स्मारक पर माता की प्रतिमा का दिव्य रूप देखते ही बनती है। दूर से ही माता की चमक लोगों को दिख पड़ती है। यहां पर श्रद्धालु माथा टेकते हैं और मनोकामना पूर्ण के लिए मन्नत मांगते हैं। मन्नत पूरी होने पर वे माता के पूजन में प्रसाद, उनके वस्त्र, उनके श्रृंगार प्रसाधन आदि कुछ भी देते हैं। यहां नवरात्रि पर पूजन करने आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद दी जाती है। एक भी श्रद्धालु बगैर प्रसाद के नहीं जाते हैं। कमेटी के लोगों द्वारा आने वाले श्रद्धालुओं की विशेष हिफाजत की जाती है। ताकि उन्हें कोई परेशानी नहीं हो।
हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है कन्हौली का दुर्गा पूजा:
कन्हौली बाजार का दुर्गा पूजा हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक माना गया है। यहां दोनों समुदाय के लोग इस पूजा में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। मुस्लिम समुदाय के युवा तो पूजन कार्य में पूरे जोश खरोश के साथ लगे रहते हैं। उनके द्वारा साफ सफाई और अन्य व्यवस्था की जाती है। माता की पूजन में मुस्लिम समुदाय की महिलाएं भी काफी संख्या में पहुंचती है। यहां सप्तमी को माता का पट खुलते वक्त दोनों समुदाय के लोग सेवा, सुरक्षा की व्यवस्था में लगे रहते हैं। यहां पूजन में पुलिस प्रशासन नहीं बल्कि दोनों समुदाय के लोग सुरक्षा व्यवस्था को संभालते हैं।
मां ने कई महिलाओं को भरी है गोद:
कन्हौली में माता पूजन का कई रूप है। यहां कई मनोकामनाएं लेकर श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई वैसे महिलाओं के गोद भरे हैं जो घर आंगन में किलकारी के लिए तरस रहे थे। यहां पर माता पूजन में महिलाएं भक्ति गीत के साथ मंगल गान भी जाती हैं। यहां पर दुर्गा पाठ पर बैठने वाले श्रद्धालु पूरी भक्ति और साधना में 9 दिनों तक लीन रहते हैं। यह पूजा कमेटी के द्वारा आस-पड़ोस के लोगों के की सहयोग से की जाती है।
