192 वी जयंती पर श्रद्धा पूर्वक याद की गई भारत की प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले।
रिपोर्टसुधीरमालाकार
रतनपुरा (वैशाली) ज्योतिराव फुले परिषद, वैशाली के तत्वाधान भारतवर्ष की प्रथम महिला शिक्षिका, नारी उत्थान के अमर क्रांतीज्योती सावित्रीबाई फुले 192 वी जयंती समारोह श्रद्धा पूर्वक आयोजित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता दीप नारायण भगत एवं संचालन जिलाध्यक्ष चंदेश्वर भगत ने की । समारोह को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश कोषाध्यक्ष सुधीर मालाकार ने कहा की भारतवर्ष मे मुगलो का शासन था, महिलाएं घर में कैद थी , रूढ़िवादी व्यवस्था ने भी महिलाओं को शिक्षा देना पाप करार दिया। जिसके कारण पूरे भारतवर्ष में सभी वर्गों की महिलाएं अशिक्षित और अनपढ़ थी ।यह बात सामाजिक क्रांति के प्रणेता ज्योतिबा फुले को समझ में आई, कि जब तक हम महिलाओं को शिक्षित नहीं कर पाएंगे तब तक परिवार व समाज का विकास नहीं हो सकता है ,इसलिए उन्होंने पहले अपनी अनपढ़ धर्मपत्नी सावित्रीबाई फुले को शिक्षित किया। उसके बाद 1848 में सर्वप्रथम बालिका पाठशाला की स्थापना की और उसके लिए प्रथम शिक्षिका सावित्रीबाई फुले बनी। उस वक्त की तथाकथित ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने इसका घोर विरोध किया लेकिन सावित्री बाई फुले ने हार नहीं मानी । अपने लक्ष्य की ओर बढ़ती रही, जिसका परिणाम है कि आज हर घर में लड़कियां पढ़ी लिखी और शिक्षित नजर आ रही है। ऐसी महान शख्सियत को जितनी भी श्रद्धांजलि दी जाए कम होगी। समारोह को संबोधित करने वालों में चूल्हाई प्रसाद भक्त ,बिंदेश्वर भगत, कमल भगत, राज किशोर भगत, उपेंद्र भगत, राजू मालाकार, उमाशंकर भगत,शत्रुघ्न भगत , ललन मालाकार , सुबोध कुमार, सविता देवी, जितेंद्र मालाकार ,गरीब नाथ भगत ,संजीव कुमार,अशोक भगत, अरुण भगत ,रंजीत कुमार , राम कुमार ,इंद्रजीत कुमार,प्रमोद कुमार , कृष्णा देवी ,राम दुलारी देवी ,शिव कुमारी देवी , राधा देवी सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।इस अवसर पर अध्ययनरत छात्र छात्राओं के बीच में पाठ्य पुस्तक का वितरण किया गया।