मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समाधान यात्रा की घोषणा के बाद गली गली घुम रहे अधिकारी।
गोरौल वैशाली जाहिद वारसी की रिपोर्ट।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के समाधान यात्रा की घोषणा के बाद गली गली घुम रहे अधिकारी।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ‘समाधान यात्रा की घोषणा के बाद जिला एवं प्रखंड अधिकारी के पैरों में जैसे चक्कर लग गया हो गली गली दरवाजे दरवाजे घूम कर समीक्षा कर रहे है,
जिस कार्य को आज दरवाजे दरवाजे घूम कर किया जा रहा है, उसी कार्य के लिए प्रखंड एवं अंचल कार्यालय जाते जाते जनता के जुते घिस जाते हैं परन्तु काम नही होता है और उदाश होकर लौट आते हैं।
ये समीक्षा कार्य मात्र मुख्यमंत्री के दिखाने के लिए किया जा रहा है, समीक्षा कार्य मात्र एक दो पंचायत के लिए नही होना चाहिए , अगर अधिकारी जनता के हित के लिए समीक्षा कर रहे हैं तो पुरे प्रखंड का समीक्षा किया जाना चाहिए तभी जाकर इमानदारी पुर्वक समीक्षा होगा।
उन सरकारी योजनाओं का समीक्षा किया जाना है जो उन्होंने गांव के अंतिम लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया था,जो विभाग के उदासीनता के कारण अनेकों कार्य अधर में लटका रहा, जैसे ही वैशाली जिला में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम की घोषणा हुई, अधिकारियों की नींद हराम हो गई और सभी विभागों की समीक्षा शुरू हो गई, प्रशासन का पूरा महकमा अपने कार्य क्षेत्र पर निकल पड़ा,
कभी बाढ़ तो कभी सुखार कि मार झेल रहे वैशाली आज भी अपने समस्याओं के जाल से नहीं निकल सका है , यह वही वैशाली है जिसे देखने के लिए विश्व से लोग यहां भ्रमण करने आते रहते हैं । मुख्यमंत्री के संभावित आगमन होना है,
विकास कार्य पूर्ण रूप से दिखाने की भरपूर कोशिश पदाधिकारियों के द्वारा किया जा रहा है । कोरोनाकाल में मृत व्यक्तियों के परिजनों को आज तक सरकार द्वारा घोषित आर्थिक मदद फाइल में ही दम घुट घुट कर मर रहा है । विधवा पत्नी और उनके बच्चे आर्थिक मदद की आस में उनकी आंखें सूज गई है , क्या इन सवालों का जवाब मात्र मुख्यमंत्री के पास है , अगर अधिकारी अपने ह्रदय से संकल्प ले लें कि हर माह विभिन्न क्षेत्रों का समीक्षा दौरा करेंगे तो क्षेत्र का एक वर्ष में काया पलट हो जाएगा और क्षेत्र में किसी भी मंत्री के आगमन से भागम भाग नही करना पड़ेगा । आज ये भागम भाग
विभाग की लापरवाही उदासीनता का ही नतीजा है
