April 19, 2026

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मानसिक रोग के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत लें मनोचिकित्सक से सहायता – डॉ नगमा ज़मीर

मानसिक रोग के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत लें मनोचिकित्सक से सहायता – डॉ नगमा ज़मीर

– अत्यधिक तनाव,समय पर नींद न आना, जल्द ही नींद खुल जाना भी है मानसिक रोग
– सदर पीएचसी में हुआ टेली मानस, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता का आयोजन

मोतिहारी, 20 जून। जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता मुहिम चलाई जा रही है। इसी के तहत मोतिहारी सदर पीएचसी में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्रवण कुमार पासवान की अध्यक्षता में टेली मानस, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता मुहिम चलाकर स्वास्थ्य कर्मियों व आम लोगों को मानसिक रोग के लक्षण की जानकारी दी गईं। मौके पर डॉ श्रवण पासवान ने बताया कि 40 एएनएम व स्वास्थ्य कर्मियों को मानसिक रोग के लक्षणों को पहचानने की जानकारी डॉ नगमा ज़मीर व अन्य उपस्थित चिकित्सकों द्वारा दी गईं। मौके पर प्रभारी डॉ श्रवण पासवान, संध्या कुमारी आदि मौजूद थी। डॉ श्रवण पासवान और डॉ मुकेश कुमार कुशवाहा ने भी सभा को संबोधित किया और मानसिक रोग से संबंधित जानकारी साझा की।

मानसिक रोग के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत लें मनोचिकित्सक से सहायता:

सदर अस्पताल की डॉ नगमा ज़मीर ने बताया कि मानसिक रोग के शुरुआती लक्षण दिखने पर तुरंत मनोचिकित्सक से सहायता लेनी चाहिए। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज करने से मानसिक रोग ठीक हो सकता है। उन्होंने महिलाओं के जीवन में होने वाले मेनोपॉज और डिप्रेशन के बारे में भी जानकारी देते हुए कहा-कि हर स्त्री के जीवन में कुछ ऐसे मोड़ आते हैं जहां उन्हें मानसिक तनाव से जूझना पड़ता है । ऐसे में कुछ महिलाएं इस परिस्थिति से अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल कर तथा घरवालों के सहयोग से कुछ समय में बाहर निकल आती हैं। कुछ महिलाएं ऐसी परिस्थिति में फंसी रह जाती और ऐसे हर दिन मानसिक तनाव से जूझना उनके लिए मानसिक रोग के दरवाजे खोल देता है । फिर भी वो मदद मांगने से कतराती रहती हैं। क्योंकि बहुत बार उन्हें समझ नहीं आता और बहुत बार सामाजिक दबाव में होती हैं। उन्होंने बताया मानसिक और शारीरिक रोग में बस एक ही अंतर है। शारीरिक रोग में हम पूरी तरह से दवाओं पर आश्रित होते और मानसिक रोग में दवा सिर्फ पचास प्रतिशत ही रोगी की मदद करता है। बाकी पचास प्रतिशत रोग से बाहर आना रोगी के हाथ में होता है। क्योंकि मानसिक रोग मन की बीमारी है। मतलब सोच की बीमारी है। सोच पर हमें खुद ही काम करना पड़ता है। इसलिए मानसिक रोग के उपचार के लिए साइकियाट्रिस्ट और क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट दोनों की ही जरूरत होती है।
मौके पर प्रभारी डॉ श्रवण पासवान, प्रबंधक संध्या कुमारी, डॉ. मुकेश कुमार कुशवाहा, डॉ. नगमा ज़मीर, उत्कर्ष उज्जवल, राजनाथ दास, अवधेश शर्मा उपस्थित थे।

डिप्रेशन के लक्षण:

*लगातार उदासी से घिरे रहना, बेचैनी महसूस करना।
*किसी न किसी वजह से मूड खराब रहना,जिंदगी से कोई उम्मीद न होना, घोर निराशा।
*नींद न आना,तड़के नींद खुल जाना या बहुत ज्यादा नींद आना।
*भूख कम लगने से लगातार वजन गिरना।
*मन में आत्महत्या के ख्याल आना या खुदकुशी की कोशिश करना।

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