शारदीय नवरात्र की कलश स्थापना कल
शारदीय नवरात्र की कलश स्थापना कल
नवरात्र पर रहने वाले की गंगा स्नान करने के लिए भीड़
कलश स्थापना पर पूजन सामग्री खरीदने में जुटे श्रद्धालु, इस बार पूरे 9 दोनों का होगा नवरात्र
महुआ। रेणु सिंह
शारदीय नवरात्र की कलश स्थापना आगामी 15 अक्टूबर रविवार को होगी। कलश स्थापना को लेकर देवी भक्तों में उत्साह और भक्ति चरम पर है। वह कलश स्थापना पर उपयोग होने वाले एक-एक पूजन सामग्री के साथ मिट्टी के घड़े की खरीदारी में जुटे हैं। शक्रवार को यहां बाजरों में पूजन सामग्री खरीदारी के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ से बाजार गुलजार हो उठा। श्रद्धालु विभिन्न देवी स्थलों, पूजा पंडालों, मंदिरों के अलावा अपने घरों पर कलश स्थापना करेंगे। कलश स्थापना दुर्गा पाठ करने को लेकर पंडितों की मांग काफी बढ़ गई है।
कलश स्थापना के प्रथम दिन श्रद्धालु देवी के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की आराधना करेंगे। महुआ में आचार्य नंदकिशोर झा ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्र पूरे 9 दोनों का हो रहा है। कलश स्थापना रविवार को पूर्वाह्न 5:55 से शुरू होकर दिनभर चलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस बार माता का पूजन विधि विधान के साथ करने की जरूरत है। उन्होंने कलश स्थापना के साथ नवरात्र पूजन में उपयोग होने वाली एक-एक सामग्री माता के चरणों में अर्पित करने की नसीहत दी है ताकि माता की स्नेह दृष्टि लोगों पर बनी रहे।
कलश स्थापना के लिए बढी मिट्टी के घड़े की मांग:
शारदीय नवरात्र पर कलश स्थापना को लेकर मिट्टी की घड़े की मांग बढ़ गई है। यहां बाजार में मिट्टी की घड़े खूब बिक रही है। सभी हाट बाजारों में कुंम्हार परिवारों द्वारा मिट्टी के घड़े व अन्य सामान लाकर बेचे जा रहे हैं। श्रद्धालु मिट्टी के घड़े में गंगाजल भरकर माता की कलश स्थापना करेंगे। पंडितों के अनुसार कलश स्थापना के लिए मिट्टी की घड़ा सबसे शुद्ध माना गया है। आचार्य का कहना है कि मिट्टी की घड़े में गंगाजल भरकर कलश स्थापना करनी चाहिए। ताकि माता के चरणों में अपनी देश की मिट्टी की खुशबू मिल सके। वही कुछ लोग कलश स्थापना को लेकर तांबे या पीतल की घड़े की भी खरीदारी कर रहे हैं। वही नवरात्र करने वाले श्रद्धालु शनिवार को आश्विन अमावस्या पर गंगा स्नान करने के लिए हाजीपुर जाएंगे।
घोड़ा पर आगमन और चरण पादुका से करेंगी प्रसथान:
वही अन्य पंचांग के अनुसार हाथी पर आगमन और मुर्गा पर होगा प्रस्थान
आचार्य नंदकिशोर झा बताते हैं कि इस बार माता का आगमन घोड़ा पर हो रहा है। वही प्रस्थान पैदल होगा। आचार्य के अनुसार माता का आगमन और प्रस्थान दोनों अशुभकर माना जा रहा है। इससे राजनीति गलियारे में उथल-पुथल रहेगी तथा आमजन में बेचैनी का माहौल होगा। उन्होंने बताया कि इसे शुभ में बदलने के लिए माता का पूजन विधि विधान के साथ भक्ति पूर्वक करना जरूरी होगा। श्रद्धालु 15 अक्टूबर को कलश स्थापन पर नवरात्र पूजन के साथ विसर्जन 24 अक्टूबर को होगा।
