April 22, 2026

NR INDIA NEWS

News for all

आधुनिकता के दौर में भी कायम है मिट्टी की बनी दीयों की विसात

आधुनिकता के दौर में भी कायम है मिट्टी की बनी दीयों की विसात
दीपावली पर मिट्टी के दीए से जगमग होंगे घर-मंदिर से लेकर खेत और खलिहान, रंग बिरंगी इलेक्ट्रिक बल्ब पर भारी पड़ रही मिट्टी के दीए
महुआ। रेणु सिंह
दीपावली पर दीपोत्सव को लेकर मिट्टी की बनी दीयों की मांग खूब हो रही है। हाट-बाजार से लेकर लोग शिल्पकारों के घर तक पहुंचकर मिट्टी के बनी दीए की खरीदारी कर रहे हैं। इस आधुनिकता की दौड़ में रंग बिरंगी इलेक्ट्रिक बल्बों पर आज भी मिट्टी के बनी दीयों की विसात कायम देखने को मिल रहा है। दीपावली पर घर मंदिर से लेकर खेत खलिहान को जगमग करने के लिए लोग मिट्टी के दीयों की खरीदारी जमकर कर रहे हैं।
दीपावली के पूर्व संध्या पर शनिवार को यहां महुआ बाजार में मिट्टी के बनी दीयों की खरीदारी कर रहे लोगों ने बताया कि आधुनिक सफर में चाहे लोग जहां तक पहुंच जा, फिर भी हमे विरासत में मिली संस्कृति और पुरानी परंपरा कभी काम नहीं होंगी। बताया कि आधुनिकता की दौड़ में इलेक्ट्रिक के बनी रंग बिरंगी चमकीले बल्ब से लोग घर को सजा तो देते हैं लेकिन अपनी सौंधी मिट्टी से बनी दीयों की टिमटिमाती लौ सबको फीका कर देती है। लोगों ने बताया कि जब मिट्टी के दीए में सरसों या तिल के तेल डालकर जलाते हैं तो इसकी कोमल रौशनी एक नया उमंग और उत्साह पैदा करती है।
कुल देवता से लेकर मंदिर और खेत खलिहान में जलते हैं मिट्टी के दीए:
घर की महिलाएं कुल देवता से लेकर मठ मंदिरों और खेत खलिहानों में मिट्टी के दीए ही जलाती हैं। अंधकार पर प्रकाश का विजय पर्व दीपावली ही एक ऐसा पर्व है जो गृहस्थ परिवार में इसका विशेष महत्व होता है। कुल देवता पर महिलाएं पांच या सात दीए जलाकर अंधकार को दूर कर प्रकाश लाने के लिए मिन्नत करती हैं। इसके बाद अन्य देवी देवताओं मठ मंदिर, घर के हर दरवाजे, खिड़की, पेटी-बक्सा, काम आने वाली रोज मार के समान, मवेशियों के नाद, खूंटा के अलावे खेत खलिहान को भी इसी मिट्टी के दिए से जगमग कर उजाला प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है। खासकर जिस खेत में फसल लगी है और जो फसल कट के खलिहान में आई है। उस पर गृहस्थ परिवार में दीए जलाकर अन्न धन भारी रहने की कामना की जाती है।
दीए में जलकर नष्ट हो जाते हैं विषैले कीड़े:
ऐसा माना जाता है कि दीपावली की रात जलाए गए दीए में विषैले कीड़े जलकर नष्ट हो जाते हैं। गांव में लोग खेत खलिहान तक मिट्टी के दीए जलते हैं। ताकि उसमें फसल को हानि पहुंचाने वाली विषैले कीड़े जलकर मर जाएं। इधर कुम्हार परिवार द्वारा बताया गया कि उन्हें मिट्टी के दीए बनाने में जो लागत आती है। वह तो मिल नहीं पाती लेकिन जब उनके बनाए गए दीए हर घर पर जलकर रोशनी बिखेड़ती है तो उसे देखकर जो खुशी मिलती है। वह जीवन की बड़ी कमाई जैसी लगती है। उन्होंने बताया कि मिट्टी कोयला की खरीदारी महंगी हो गई है। फिर भी मिट्टी के दीए बनाकर लोगों के घर तक पहुंचाते हैं और बाजार में बेचते हैं। जो जितने दाम दे दिए उनके घर को रौशन करने के लिए दीए दे देते हैं।
दीपावली पर बहने भरती है घरौंदा:
दीपावली की रात बहने अपने भाई के घर अन्न धन से भरे रहने के लिए घरौंदा से भरती है। बहने छोटे से फोम, कुट, मिट्टी, ईंट आदि की घर बनाकर उसमें मिट्टी के बर्तन में अन्न, धन, मिष्ठान रखकर भरती है। ताकि भाई का घर कभी खाली नहीं हो और उनके यहां हमेशा खुशियां बरसती रहे। घरौंदा के लिए भी इस समय मिट्टी के विभिन्न प्रकार की बनी बर्तन आदि की बिक्री खूब हो रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Copyright © All rights reserved. | Newsphere by AF themes.