समय रबी फसलों में सिंचाई की और बांझ बनी महुआ से गुजरने वाली नहरें
समय रबी फसलों में सिंचाई की और बांझ बनी महुआ से गुजरने वाली नहरें
महुआ से होकर गुजरने वाली विभिन्न गंडक नहरों में पानी नहीं
फसल में सिंचाई करने के लिए किसान हो रहे परेशान
महुआ। रेणु सिंह
इस समय फसलों में सिंचाई की जरूरत है। जबकि महुआ से होकर गुजरने वाली विभिन्न गंडक नहरों में पानी नहीं है। जिससे किसान पेशोपेश में है। उन्हें फसलों की सिंचाई करने के लिए काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। जबकि सरकार द्वारा खोदे गए गंडक नहर उन्हें मुंह चिढ़ा रही है।
शनिवार को यहां किसानों ने सूखी गंडक नहरों को दिखाते हुए बताया कि फसलों में सिंचाई करने के लिए सरकार ने उन लोगों की अच्छी खासी और कीमती भूमि ले ली। जबकि समय पर इसमें कभी भी पानी नहीं छोड़ा जाता। नहरों में पानी तब आता है जब चारों ओर लोग बाढ़ की चपेट में रहते हैं। उसमें यह नहर की पानी पहुंचकर लोगों को और संकट बढ़ा देती है। महुआ के मंगरू चौक से होकर गुजरने वाली गंडक नहर यहां मानपुरा, गोरीगामा, पहाड़पुर, गरजौल, मुकुंदपुर, सदापुर, चकजाहिद, शंकरपुर, कादिलपुर, अब्दुलपुर, सूरतपुर, नीलकंठपुर, बनारसीपुर, अख्तियारपुर, लक्ष्मणपुर सहित दर्जनों गांव से होकर गुजरती है। वही अक्षयवट राय कॉलेज से होकर गुजरने वाली गंडक नहर हकीमपुर, माधौल, सिंहराय, गंगटी, करहटिया पहाड़पुर, हरपुर सहित दर्जनों गांव से होकर निकलती है। जिसमें समय पर कभी भी पानी नहीं रहता। वही मुकुंदपुर, सरसई, पताढ, लक्ष्मीपुर बखरी, नारायणपुर, बरियारपुर होते हुए निकलने वाली घाघरा नहर भी किसानो को फायदा तो नहीं देती। यह बाढ़ के समय संकट पैदा करती है। नहर किनारे फसलों की सिंचाई करने के लिए किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके लिए वे बोर्डिंग, पंप सेट तलाशते हैं। किसान रामप्रवेश सिंह, सुरेंद्र राय, महेंद्र राय, हरेंद्र राय, ज्वाला प्रसाद, गणेश सिंह, अनिल प्रसाद, निरंजन कुमार आदि बताते हैं कि जब नहरे खुदी थी तो उनकी अच्छी और उपजाऊ भूमि इसमें चली गई। फिर भी आशा थी कि समय पर इसमें पानी छोड़ा जाएगा और वे लोग फसलों की सिंचाई कर पाएंगे। जबकि यह नहर उनके लिए मुंह चिढ़ाने जैसा साबित हो रही है। ऊपरी भूमि पर 90 फ़ीसदी किसानों ने गेहूं की बुआई कर ली है। वहीं चंवर की भूमि में धान काटने के बाद किसान खेतों को रबी बुवाई की तैयारी कर रहे हैं। किसान बताते हैं कि गेहूं की बुआई 15 नवंबर से 15 दिसंबर तक की जाती है। जबकि इस बार कुछ किसानों ने समय से पहले भी गेहूं की बुवाई कर ली है।
रबी फसलों में सिंचाई की होती है अधिक जरूरत:
महुआ के किसान बताते हैं कि रबी फसलों में सबसे ज्यादा जरूरत सिंचाई की होती है। यह फसल सिंचाई के बदौलत ही ली जाती है। यही एक फसल है जिसे किसान सिंचाई के बदौलत अपने मन मुताबिक उपजाते हैं। इस समय खेतों में किसान आलू, मटर, गेहूं, मसूर, मकई, जई, उड़द, हरी सब्जियां सहित विभिन्न फासले लगा रखे हैं। जिसमें सिंचाई करना किसानों के लिए बेहद जरूरी है। किसानों ने बताया कि नहर खोदी गई तो इसमें समय पर पानी भी छोड़ जाना चाहिए। ताकि वे लोग फसलों में सिंचाई कर सकें।
