चार प्रचार रथ शहरी क्षेत्र में एईएस पर करेगें लोगों को जागरुक
चार प्रचार रथ शहरी क्षेत्र में एईएस पर करेगें लोगों को जागरुक
– शहरी पीएचसी से प्रचार वाहनों को किया गया टैग
– बढ़ते तापमान के मद्देनजर जिला प्रशासन चमकी पर अलर्ट
मुजफ्फरपुर, 9 जून।
एईएस/ चमकी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा प्रचार – प्रसार का कार्य लगातार जारी है। इस क्रम में जिलाधिकारी प्रणव कुमार के द्वारा चार प्रचार वाहनों को हरी झंडी दिखाकर शहरी क्षेत्र में एईएस और चमकी बुखार को लेकर लोगों को जागरूक करने के मद्देनजर रवाना की गई। जिला वेक्टर बार्न रोग पदाधिकारी डॉ सतीश कुमार ने बताया कि स्वास्थ विभाग द्वारा सभी चार वाहनों को शहरी क्षेत्र के सभी चार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से टैग कर दिया गया है। जिसके द्वारा संबंधित क्षेत्र में चमकी बुखार को लेकर लोगों को जागरूक किया जाएगा। वहीं इस बाबत जिलाधिकारी ने कहा कि एईएस/ चमकी बुखार पर प्रभावी नियंत्रण के मद्देनजर शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक जन जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीड़ित बच्चों की इलाज हेतु माकूल चिकित्सीय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। उन्होंने कहा कि प्रचार- प्रसार का मुख्य उद्देश्य पीड़ित बच्चों को बिना समय गवाएं निकट के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या एसकेएमसीएच में पहुंचाना है ताकि उनका समुचित इलाज किया जा सके। अभी बढ़ते टेंपरेचर को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ विभाग अलर्ट है और इस संबंध में सभी आवश्यक निर्देश सभी अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मी तथा चिकित्सकों को दिए गए हैं। मौके पर उप विकास आयुक्त डॉ० सुनील कुमार झा, सिविल सर्जन डॉक्टर एस के चौधरी, सहायक समाहर्ता श्रेष्ठ अनुपम, डीपीएम बीपी बर्मा, डीपीआरओ कमल सिंह, जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ एके पांडे, केयर डिटीएल सौरभ तिवारी के साथ अन्य अधिकारी एवं स्वास्थ्य कर्मी उपस्थित थे।
एईएस पर काम की बातें
चमकी आने पर सांस की नली को खुला रखने के लिए रोगी को एक तरफ लिटाएं। ठुड्डी को उठाकर रखें और एक हाथ गाल के नीचे रख दें। शरीर की स्थिति को स्थिर रखने के लिए एक पैर मोड़ दें या तुरंत ही अपने आशा/जीविका दीदी/ आंगनबाड़ी सेविका से संपर्क करें तथा नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाएं। किसी झोला छाप डॉक्टर या झाड़ फूंक में न पड़ें।
चमकी न हो इसके लिए क्या करें:-
धूप में बच्चों को न खेलने दें।
रात में खाने में मीठा जरुर दें।
रात में खाना खिलाकर ही बच्चों को सुलाएं।
सुबह उठते ही बच्चों को उठाएं और देखें, बच्चा कहीं बेहोश या उसे चमकी तो नहीं।
नदी, पोखर या तालाब के किनारे बच्चों को न खेलने दें।
बेहोशी या चमकी दिखते ही तुरंत एम्बुलेंस या नजदीकी गाड़ी से अस्पताल ले जाएं।
