मौसम चक्र बदलने के कारण खेती में किसानों को हो रहा धोखा
मौसम चक्र बदलने के कारण खेती में किसानों को हो रहा धोखा
महुआ। रेणु सिंह
मौसम चक्र को बदलने के कारण किसानों को अब परंपरागत खेती करने में धोखा हो रहा है। वह मौसम के अनुसार फसल तो लगाते हैं लेकिन विपरीत परिस्थिति में उत्पादन मन के अनुसार नहीं ले पाते। जिसके कारण किसान खेती से मुंह मोड़ने लगे हैं।
मंगलवार को यहां किसानों ने बताया कि अब खेती में पहले वाली बात नहीं है। यहां किसान प्रकृति आधारित फसल लगाते हैं, लेकिन उनके साथ मौसम की धोखेबाजी होने से वह टूट रहे हैं। किसानों ने बताया कि अब वे लोग खेती व्यवसाय की दृष्टि से करते हैं। अच्छी फसल लेने के लिए वे खेतों में काफी पूंजी लगते हैं। जबकि मौसम अनुकूल नहीं रहने के कारण फसल ठीक नहीं हो पाती और उत्पादन कम जाता है। जिसके कारण उनकी पूंजी मारी जाती है और अगला खेती में व्यवधान पैदा हो जाता है। यहां किसान उमा सिंह, जय नारायण सिंह, रंजीत कुमार सिंह, प्रमोद राय, सुरेंद्र राय, हरेंद्र राय, प्रवेश महतो, निरंजन प्रसाद, सूर्यकांत सिंह, कामेश्वर प्रसाद, सुरेश कुमार, वीरेंद्र सिंह, महेश सिंह आदि ने बताया कि अब खेती करना उनके लिए बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। सब कुछ करने के बाद मौसम अनुकूल नहीं रहने से फसल खराब हो जाती है। जिससे खेतु में लगाई गई पूंजी भी नहीं निकाल पाती।
लागत रुपैया और आमदनी अठन्नी:
मौसम परिवर्तित होने के कारण किसानों को खेती करने में लागत रुपैया और आमदनी अठन्नी बाली कहावत सिद्ध हो जाती है। किसानों ने बताया कि पिछली बार खरीफ फसल के लिए मौसम ठीक नहीं रहा। बारिश समय से नहीं होने कारण वे धान की समय से ना तो रोपनी कर पाए और न ही अच्छी उपज आई। अब रबी फसल पर मौसम की प्रतिकूलता भारी पड़ रही है। हालांकि किसान बताते हैं कि वे परंपरागत खेती को छोड़ भी नहीं सकते। यहां इसका विकल्प भी नहीं है।
इधर कृषि विभाग द्वारा बताया जा रहा है कि मौसम में प्रतिकूलता आई है। जिसके कारण किसानों को परंपरागत खेती करने में काफी दिक्कतें आ रही है। यहां प्रकृति आधारित खेती होती है। जाड़े में रबी तथा गर्मी में खरीफ फसल यहां ली जाती है। फिर भी किसान प्रकृति की प्रतिकूलता को रौंदते हुए अच्छी उपज लेने के लिए पूरी मेहनत करते हैं। किराना फसल के लिए मौसम अनुकूल जा रहा है।
