महिला शिक्षिका का ऐच्छिक तबादला की अधिसूचना को देखते ही कई शिक्षक संघो के पेट में दर्द- महेश कुमार
महिला शिक्षिका का ऐच्छिक तबादला की अधिसूचना को देखते ही कई शिक्षक संघो के पेट में दर्द- महेश कुमार
विभूतिपुर/समस्तीपुर
महिला शिक्षिका का ऐच्छिक तबादला की अधिसूचना को देखते ही कई शिक्षक संघो के पेट में दर्द होना शुरू हो गया है।उक्त बातें
शिक्षक सह प्रभारी प्रधानाध्यापक प्राथमिक विद्यालय भीड़ी विभूतिपुर, समस्तीपुर के महेश कुमार ने कहा।उन्होंने बताया कि शिक्षक समाज एक कहावत को सुने ही होंगे आज वही चरितार्थ होते दिख रही है। जितने दूसरे की खुशी से दुख होता है उतना अपने दुख से दुख नहीं। कहने का भाव यह है कि शिक्षा विभाग ने जहां महिला शिक्षिकाओं एवं दिव्यांग पुरुष शिक्षकों का अंतर नियोजन इकाई (अंतर जिला) सहित विभाग के द्वारा अधिसूचना संख्या 011 / नियमावली 01_01 /2020 … 875 पटना, दिनांक 7_06- 2021 के द्वारा जारी किया गया। इस सूचना के जारी होते ही पूरे बिहार के महिला शिक्षिकाओं एवं दिव्यांग शिक्षकों में इतनी ज्यादा खुशी आ गई, कि मानो 2003 से अभी तक का जो सपना था वो पुरा हो गया। अपने पूरे परिवार से अलग रहकर अपनी सेवा स्कूल में दे रही थी। इस आस में हम अपने ससुराल चले जाएंगे। क्योंकि कितनी महिला शिक्षिकाओं का तो हाथ पीला नौकरी के बाद हुआ और कितनी को तो अपने घर से 70 से 75 किलोमीटर दूरी रहकर नौकरी करनी पड़ रही है। इसी प्रकार दिव्यांग शिक्षकों का तो खुशी का और ठिकाना नहीं है यह खुशी हमारे ही साथ काम कर रहे कुछ चुनिंदा शिक्षक संघ को हजम नहीं हो रहा है। और वह सभी संघ अभी इस स्थांतरण का विरोध कर रहे हैं। लगता है कि उन सभी संघ के पदाधिकारियों के पेट में दर्द शुरू हो गया है। क्योंकि इन लोगों को केवल अपना सुख और अपनी ही खुशी देखी जाती है। ना कि दूसरों की खुशी इसीलिए हम सभी शिक्षक समाज यह मांग करते हैं कि जिस प्रकार अभी महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों का स्थानांतरण सरकार करने जा रही है। उस पर हम सभी को खुशी होनी चाहिए, क्योंकि हम सभी पुरुष शिक्षकों का भी स्थांतरण इसी आधार पर होगा। हम सभी शिक्षक सरकार से यह मांग करते हैं कि जिस प्रकार महिला एवं दिव्यांग शिक्षकों का स्थानांतरण की अधिसूचना जारी किए हैं उसी प्रकार पुरुष शिक्षकों का भी स्थानांतरण की अधिसूचना जारी करें। हमको ऐसे शिक्षक संघ से भी नम्र निवेदन प्रार्थना करते हैं कि हस्तांतरण की प्रक्रिया को पूर्ण होने दें इसमें किसी भी प्रकार की विघ्न बाधा उत्पन्न ना करें। क्योंकि हम सभी पुरुष समाज यह जानते हैं कि महिला के ऊपर कितनी बड़ी जवाबदेही होती हैं और यह भी जानते हैं एक दिव्यांग व्यक्ति को उसके परिवार से कितनी अपेक्षा होती है।
