एडवर्स पजेशन हमारे पास,लिमिटेशन एक्ट 1963 की अनुच्छेद 65 एवं अनुच्छेद 27 हमारे हक मे”-ललन
“एडवर्स पजेशन हमारे पास,लिमिटेशन एक्ट 1963 की अनुच्छेद 65 एवं अनुच्छेद 27 हमारे हक मे”-ललन
रिपोर्ट :नसीम रब्बानी, बिहार
मालिकाना हक देने को लेकर हाजीपुर नगर के अम्बेडकर कालोनी में अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ बिहार के प्रदेश अध्यक्ष ललन राम के अध्यक्षता एवं बिहार राज्य राउत मेहतर पंचायत के सरदार अरूण राम के संचालन में महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में विगत 70 वर्षों से तीन पीढ़ियों से अम्बेडकर कालोनी में आबासीत परिवार रहते आ रहें हैं।लेकिन अभी तक मालिकाना हक नहीं दिया गया है और ना ही किसी तरह का कोई कागज़ आदि पर विस्तार रूप से चर्चा किया गया।
इस अवसर पर सर्व सम्मति से प्रस्ताव पारित कर सरकार और जिला प्रशासन से जमीन का मालिकाना हक मांगने को लेकर चरणबद्ध आंदोलन चलाने का प्रस्ताव पारित किया गया। पारित प्रस्ताव मे जमीन के मालिकाना हक की कानूनी लड़ाई के लिए समाज की ओर से अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ बिहार के प्रदेश अध्यक्ष ललन राम को अधिकृत किया गया। इस अवसर पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में संघ के प्रदेश अध्यक्ष ललन राम ने कहा कि लिमिटेशन एक्ट 1963 के अनुच्छेद 65 एवं अनुच्छेद 27 के तहत Adverse possession (प्रति कूल कब्जा) के आलोक मे सर्वे वार्ड 6 खाता नंबर ५६१ खेसरा- में नगर पालिका के नाम से दर्ज जमीन का कब्जाधारी आबासीत परिवारो को मालिकाना ह अवस्थित अंबेडकर कॉलोनी में तीन प्रयोग से लगातार शांतिपूर्वक बिना किसी रोक-टोक के विगत 70 वर्षों से खाता की भूमि पर वास करते आ रहे हैं। लिमिटेशन एक्ट की धारा 1963 के अनुच्छेद 65 एवं अनुच्छेद 27 के तहत एडवर्स पोजीशन प्रतिकूल कब्जा हमारे पास है।माननीय सर्वोच्च न्यायालय के तीन सदस्यीय जजों की बड़ी बेंच संविधान पीठ ने लिमिटेशन एक्ट 1963 के अनुच्छेद 65 के हवाले से अपने निर्णीत फैसला में कहा है कि सरकारी जमीन पर वैधानिक अवधि ३०वर्ष है। इस अवधि मे बिना किसी रोक-टोक के शांतिपूर्ण तरीके से ३०वर्षो तक निरंतर और लगातार रहते आ रहें हैं।एडवर्स पोजीशन प्रतिकूल कब्जाधारी जमीन का मालिकाना हक प्राप्त करने का दावा पेश कर सकता है। आगे श्री राम ने लिमिटेशन एक्ट 1963 के अनुच्छेद २७ के तहत निजी जमीन पर १२ साल और सरकारी जमीन पर ३० साल निर्धारित वैधानिक अवधि के अन्दर जमीन का मालिक अगर कब्जाधारी व्यक्तियों पर हटाने को लेकर कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं अपनाया जाता है। तथा कब्जाधारी व्यक्ति निरंतर, लगातार शांतिपूर्वक बिना किसी रोक-टोक के सार्वजनिक रूप से निर्धारित अवधि से ज्यादा दिनों तक रहते आ रहें हैं तो संबंधित जमीन मालिक अपना स्वामित्व और अधिकार खो देता है,तथा कब्जाधारी व्यक्ति मालिक बन जायेगा।लिमिटेशन एक्ट 1963 के अनुच्छेद 27 के अनुसार सर्वे वार्ड ६खाता नंबर ५६१ खेसरा- में दर्ज जमीन जो नगर पालिका के नाम से है। नगर पालिका हाजीपुर जो अब नगर परिषद है।वो उक्त भूमि पर से मालिकाना हक खो दिया है वो अब इस जमीन का मालिक नहीं है?
कब्जाधारी जमीन पर बने खपरैल मकान को वर्ष ९४-९५ में हाउसिंग एंड अर्वन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (हुडको) द्वारा कच्चे मकान को पक्कीकरण कर छत वाला बनाया गया था। लेकिन उक्त मकान में बिजली पानी और शौचालय की व्यवस्था नही किया गया और ना ही इस से संबंधित कोई दस्तावेज या आवंटन लेकर नहीं दिया गया है।हम कब्जाधारी परिवारो के पास तीन पीढ़ियों से बसे भूमि के पते का साक्ष्य उपलब्ध हैं। जैसे आधार कार्ड,पैन कार्ड,राशनकार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल सर्टिफिकेट,बैक पासबुक,जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाणपत्र, आदि अन्य दस्तावेज उपलब्ध है जो माननीय सर्वोच्च न्यायालय और लिमिटेशन एक्ट 1963 के अनुच्छेद 65 एवं अनुच्छेद 27 के सभी शर्तों दिशा निर्देशों का शत-प्रतिशत पुरा करते हैं।उक्त भूमि पर वर्तमान में संबंधित व्यक्तियों का एडवर्स पोजीशन प्रतिकूल कब्जा है।कानूनन हम मालिकाना हक के लिए दावा पेश कर रहे हैं। इस अवसर पर संघ के जिला अध्यक्ष दीपक राम, अरुण कुमार, राकेश कुमार,रामू कुमार, राजेश राम, सिकन्दर राम, गौतम राम, लक्ष्मी राम, मनोज राम, शम्भू राम, मुन्ना राम, रामानंद सागर, संजय राम, आदि समेत सैकड़ों लोग उपस्थित थे।
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