वैदिक व्यवस्था को जीवंत बनाए रखने के लिए गुरुकुलम का हो रहा निर्माण
वैदिक व्यवस्था को जीवंत बनाए रखने के लिए गुरुकुलम का हो रहा निर्माण
अजीत कुमार सिंह ने दी जानकारी
महुआ। रेणु सिंह
प्राचीन वैदिक व्यवस्था को जीवन्त बनाये रखने के दृष्टिकोण से नाड़ी गाँव, तिसिऔता, पातेपुर (वैशाली) में बरैला झील के किनारे स्वामी श्रद्धानंद गुरुकुल का निर्माण किया जा रहा है। यह गुरुकुल उत्तर बिहार क्षेत्र का प्रथम गुरुकुल होगा जो पूर्ण रूपेण समाज पोषित एवं नि:शुल्क गुरुकुल होगा। जिसमें ब्रह्मचारी बिहार बोर्ड (हिंदी माध्यम) की सभी आधुनिक शिक्षाओं( गणित, विज्ञान, कंप्यूटर, अंग्रेजी) के साथ-साथ वैदिक शिक्षा का भी ज्ञान प्राप्त करेंगे । जिसमें मुख्य रूप से अष्टाध्यायी के सभी सूत्रों का ज्ञान के साथ-साथ संस्कृत और संस्कृत व्याकरण पर मूल रूप से कार्य किया जाएगा।
यह गुरुकुल जिला आर्य सभा के देखरेख में संचालित होगा एवं इस गुरुकुल में रहने वाले सभी 50 ब्रह्मचारियों उनके आचार्य ,गौशाला, गौशाला के सेवक एवं भोजन बनाने वाले सेवक इन सभी की व्यवस्था स्थानीय सर्व समाज एवं ज्ञान ज्योति गुरुकुलम मिलकर मुख्य रूप से करेगी।
इस गुरुकुल का उद्घाटन 17 अप्रैल 2024 ,रामनवमी तिथि के दिन होना तय हुआ है।
इस गुरुकुल के संस्थापक सदस्यों में से एक ज्ञान ज्योति गुरुकुलम के निदेशक अजीत कुमार आर्य ने गुरुकुलम के विषय में विस्तार से बताते हुए कहा कि आधुनिक युग में हमारी संस्कृति, संस्कृत एवं वैदिक व्यवस्था की पुनर्स्थापना के लिए इस तरह के सैकड़ो और हजारों गुरुकुलों की आज आवश्यकता है। जहां बच्चे हमारी भारतीय सनातन सभ्यता एवं अपने गौरवशाली परंपराओं को समझते हुए शोध परख एवं अनुसंधान परख शिक्षा के तरफ अग्रसर होगें। स्वामी श्रद्धानंद गुरुकुल इस कार्य के लिए प्रतिबद्ध है होगा।
