हनुमान जी जैसा सेवक धरती पर दुसरा नही : पंडित कुशेश्वर चौधरी ।
हनुमान जी जैसा सेवक धरती पर दुसरा नही : पंडित कुशेश्वर चौधरी ।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार ।
वैशाली !महुआ, नगर क्षेत्र के पुरानी बाजार स्थित महावीर मंदिर परिसर में 68वें वार्षिक आध्यात्मिक आयोजन किया गया। आध्यात्मिक आयोजन में कथा प्रवचन करते हुए मानस मर्मग कथावाचक पंडित कुशेश्वर चौधरी में प्रभु श्री राम के सेवक के रूप में हनुमत जी की चर्चा की। उन्होंने कहा कि सुग्रीव से मित्रता करना , सेना जुटाना , समुद्र लांघना , लंका जलाना , विभीषण से मिलवाना एवं लंका में बिरह अवस्था में पड़ी सीता को सांत्वना देना जैसी सेवा श्री हनुमान जी ने ही किया था। इन्होंने भारत , लक्ष्मण , श्री सीता एवं स्वयं भगवान श्री राम को उपकृत किया लेकिन बदले में किसी प्रकार की कामना या याचना नहीं की। राम रावण युद्ध में इन्होंने हाथी के झुंड को हाथी से , घोड़े को घोड़े से तथा रात से रात को टकराकर तहस-नस कर दिया। किसी को चुपके से दबोच लिया , किसी को समुद्र में डूबा दिया , किसी को जमीन में धंसा दिया तो किसी को आकाश में उड़ा दिया। देवगन आकाश में खड़े होकर युद्ध देख रहे थे । भगवान राम , श्री शंकर एवं भगवान नारायण भी देख-देख कर प्रसन्न हो रहे थे। लक्ष्मण जी को दिखाते हुए भगवान राम कहते हैं की अपनी लंबी मूछ में लपेटकर बड़े-बड़े वीरों को पटक रहे हनुमान का युद्ध कौशल देखो की कितने अच्छे लग रहे हैं।इस कथा आयोजन में उत्तर प्रदेश से पधारे हुए श्री अंगद जी , छपरा से प्रो विद्याभूषण , एवं बक्सर से पधारे एक कीर्तनकार का संगीतमय प्रवचन हो रहा है।
