“मम विद्यालय ” लेख के बहाने छात्र ने खोली सरकारी विद्यालय की पोल ।
“मम विद्यालय ” लेख के बहाने छात्र ने खोली सरकारी विद्यालय की पोल ।
रिपोर्ट सुधीर मालाकार ।
हाजीपुर (वैशाली )बिहार के सरकारी विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था कितना दुरुस्त है ,यह किसी से छुपी हुई नहीं है।हां थोड़ी बहुत परिवर्तन देखने को तो मिलता है लेकिन वास्तविकता में कुछ और ही है। पहले शिक्षक लेट लतीफ थे अब समय से आ रहे हैं, लेकिन पढाने के नाम पर आज भी वे कन्नी काटते नजर आ रहे हैं। उनका समय विद्यालय में आकर मोबाइल चलाना, गप्पे लगाना और फिर समय पर घर के लिए रवाना होना तक सीमित है ।विद्यालय के विकास की राशि की लीपापोती करना तो इनका सर्वाधिक अधिकार है ।मध्यान भोजन में भी बड़ी घोटाला देखने को मिलता है। जहां पर खाना एनजीओ के माध्यम से आता है वहां भी छात्रों की उपस्थिति की हेरा फेरी दिखाई जाती है। यह बात सरकारी विद्यालय में पढ़ने वाले छात्र ने ही लिखी है।बताते चलें कि अर्धवार्षिक परीक्षा में प्रश्न पत्र में मम विद्यालय निबंध पर अपने लेखनी के माध्यम से विद्यालय की हकीकत को लिखा है । विद्यार्थी ने अपने मम विद्यालय निबंध पर लिखते हुए लिखा कि मास्टर सिर्फ पैसा खाते हैं और सरकार भी प्रत्येक महीने खाता में डाल देती है। मास्टर इतना कंजूस है की बच्चों के भोजन के पैसे भी खा जाते हैं। पढ़ाने के बदले में दिनभर मोबाइल चलाते रहते हैं और गप्पे लगाते रहते हैं ।ईमानदारी पूर्वक यह मास्टर बच्चे को पढ़ा देते हैं तो क्या बिगड़ जाता। बच्चे द्वारा लिखे गए निबंध में विद्यालय की जो हकीकत वाया की गई है, यह किस विद्यालय की है, यह हमारा समाचार पत्र पुष्टि नहीं करता है ।
