April 18, 2026

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चिराग पासवान ने दिवंगत सुरेंद्र शास्त्री को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नैन तारा नाटक का भी किया उद्घाटन

चिराग पासवान ने दिवंगत सुरेंद्र शास्त्री को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, नैन तारा नाटक का भी किया उद्घाटन।

रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
महुआ( वैशाली )प्रखंड क्षेत्र के समसपुरा पंचायत अंतर्गत कुशहर खास गांव में दिवंगत नेता सुरेंद्र पासवान शास्त्री को श्रद्धांजलि देने के लिए केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान पहुंचे। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच उन्होंने स्वर्गीय शास्त्री जी के आवास पर पहुंचकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और दिवंगत नेता के योगदान को याद किया। इस अवसर पर चिराग पासवान ने स्वर्गीय शास्त्री जी के निधन पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जैसे समाजसेवी का जाना देश और समाज के लिए बड़ी क्षति है।

चिराग पासवान ने शोकाकुल परिवार के सदस्यों, शास्त्री जी के पुत्र इंद्रजीत कुमार, अमरजीत कुमार और अजीत कुमार से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने का आग्रह किया। दिवंगत शास्त्री जी की आखिरी नाटक नयन तारा जिसे शास्त्री जी नहीं रंगमंच पर उतर सके, उसे स्थानीय कलाकार द्वारा मंचित किया गया, जिसका उद्घाटन चिराग पासवान ने फीता काटकर की।
श्रद्धांजलि सभा में क्षेत्र के कई प्रमुख लोग शामिल हुए। जदयू की प्रसिद्ध नेत्री डॉ. आसमा परवीन, लोजपा नेता संजय सिंह ,श्रीकांत पासवान, सरपंच रंजू देवी , युगल किशोर पासवान, सुबोध पासवान, प्रभात कुमार, संगम कुमार, सुनील कुमार, पूर्व मुखिया मोतीलाल पासवान, पूर्व जिला पार्षद प्रतिनिधि अशर्फी दास,मनीष यादव ,दिनेश पासवान जैसे स्थानीय गणमान्य लोग भी वहां उपस्थित थे।
इसके अलावा, कई अन्य लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से शास्त्री जी को श्रद्धांजलि दी। दूरस्थ स्थानों से भी दिवंगत नेता के सम्मान में श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में उनके घनिष्ठ मित्र और दिल्ली के वरिष्ठ पत्रकार मदन भारती भी शामिल रहे, जिन्होंने उन्हें बड़े भाई की तरह माना। कुछ लोग ऑनलाइन जुड़े रहे,उनके अन्य मित्रों में रामनाथ विद्रोही, डॉ. सुरेश, सुधीर मालाकार, विनोद पटेल, पत्रकार नवनीत कुमार, सुनील कुमार सिंह,राम लगन भारती, श्रवण जैसे लोग भी शामिल रहे।
डॉ. सुरेश ने विशेष रूप से इस आयोजन में शास्त्री जी के सम्मान में “नयन तारा” नाटक में उनके किरदार का अभिनय कर उन्हें अनोखी श्रद्धांजलि दी। यह नाटक शास्त्री जी के जीवन का आखिरी प्रदर्शन बनने वाला था, और उनके निधन के बाद इसे उनके सम्मान में किया गया। यह आयोजन न केवल रंगमंच के क्षेत्र में बल्कि पूरे समाज के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।
शास्त्री जी के असामयिक निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए आई इस बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह साबित कर दिया कि वे न केवल एक कुशल रंगकर्मी थे, बल्कि समाज में अपने अद्वितीय योगदान के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।

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