आजादी के इतने दिनों के बाद भी देश, आर्थिक,सामजिक राजनीतिक रुप सेआज भी खतरे में है।
आजादी के इतने दिनों के बाद भी देश, आर्थिक,सामजिक राजनीतिक रुप सेआज भी खतरे में है।
विपक्ष के आपसी मत भेदों से 25 के विधान सभा में एन डी ए दो तिहाइ बहुमत की प्रत्याशा से आगे जाने की ओर । ————‐–
(रवींद्र कुमार रतन, स्वतंत्र लेखन ,सेनानी सदन ।)
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भारत का सौभाग्यसूर्य,र्हिमालय भाल का ज्योतिर्मय तिलक विन्दु,राष्ट्र का सबसे अनमोल दिवस, मुक्तिकाअमर आलोक पर्व 15 अगस्त 1947, स्वतंत्रता दिवस भारतीय इतिहास का
स्वर्णिम अध्याय है।इस दिन के आगमन में न जाने कितनी माताओं के मांग के दमकतेसिन्दरों से, कितने बुढो के अन्धेरे घरों के चिराग से ,न जाने कितनी बहनों की लाल
राखियों से इस आजादी के स्वागत की आरती सजाई गयी थी , ऐसा हो भी क्यों नहीअनय भित्ति फ़िरंगियो के शासन का उन्मूलन जो हुआ,
जुल्म का जनाजा निकल गया। तब जाके उस दिन राष्ट्र के स्वर्णिम प्रभात से सुसज्जित उषा रानी स्वतंत्रता की मोहक किरनों को छिटकाती प्रकट हुई थी । जन जीवन ने मुद्दत के बाद नयी अन्गराई ली थी ।एक नई ताजगी की लहर सर्वत्र लहरा रही थी ।पुन: स्वतंत्रता दिवस क्या आया, स्म्रतियों का सैलाव उमड़ पड़ा है।हमारे स्वतंत्रता संग्राम के इतने वर्षों का इतिहास स्मृति के वातायन से झांकने लगता है यदि हम इस इतिहास का अवलोकन करते हैं तो हमारे सामने उपलब्धियों एवं अभावों का धुपछाहीं परिधान निर्मित हो जाता है ।हम प्रगति की सीढियों पर चढे है याअगति के खण्डकों मे गिरे हैं।हमने मन:कामनाओं की मंजिल ही पायी है या मिला जुला कर यथास्थिति के परिधि की ही फेरी लगाई है । निर्णय कर पाना सहसा कठिन हो जाता है।
‘भारत माँ अब मौन त्याग तुम ही बोलो! क्या यह वही आजादी है, जिसके लाने के लिए न जाने कितनी वीरांगनाएँ अपनी मांग के दमकते सिंदुरोंसे,वच्चों ने अपने खिलौने, बच्चियों ने अपनी राखियो से सजाकर आरती उतारी थी। अहा!क्या यह वही आजादी है जिसके लिए’भगतसिंह’,’चंद्रशेखरआजाद’ ,खुदी राम , विद्रोही सुवाष,जैसे वीर बान्कुरों ने अपनी-अपनी जान की बाजी लगा दी थी। कत्तई नहीं ,यह वह स्वतंत्रत्ता भारत नहीं है जिसके लिए गोखले, तिलक ,गाँधी ने तपस्या की थी ?
राम -कृष्ण, गुरुगोविन्द सिंह और ईषा मसीह के देश में जाति,धर्म, भाई- भतीजावाद,वंशवाद,परिवार वाद, पद और पैसों के लिय लोग देश की आजादी को दाव पर लगा देते हैं।
आज न आर्थिक आजादी है ना समाजिक ,ना भाषाई, ना धार्मिक!आजादी है दल बदलने की, आजादी शोषण की,आजादी है भ्रष्टाचार की,आजादी है लुटने की, आजादी हैं माँ बहनो के अस्मत लुटने की।एसी आजादी से क्या जहाँ हम चैन की जिन्दगी भी न जी सकें।
आपस में विपक्षी ऐसे लडते है जैसे
जूठे पत्तल पर जानवरl स्थिति ऐसी हो गई है कि विपक्ष के आपसी बिखराव के कारण बगैर परिश्रम के ही 2025 की विधानसभा चुनाव में एन डी ए दो तिहाई बहुमत की प्रत्याशा की ओर अग्रसर है l
अटल बिहारी बाजपेयी जी के सपनों को साकार करने में युवाओं के प्रेरणा स्रोत आदरणीय मोदी जी आठों पहर लगे है l बिहार में उनके लक्छमन के कार्य शैलीसे उनके विजय रथ को रोकने बाला अभी कोई नही है l
जे पी का एक ईन्जिनियर सेनानी के सदप्रयास से विपक्षियों का हिम्मत पस्त सा हो रहा है । इस ताकत को आंक कर विपक्ष
किंकर्तव्यविमूढ़ हो अनिश्चय की स्थिति से गुज़र रहे हैं l
आशा ही नही अपितु पूर्ण विश्वास
है कि मोदी जी जैसे यशस्वी प्रधान
मंत्री और नीतीश जी जैसे मुख्यमंत्री
के नेतृत्व राज्य और देश दोनों प्रगति के पथ बढ़ता जायगा l
देश का चतुर्मुखी विकास होगा l
आर्थिक, सामाजिक औऱ राजनितिक स्थिति में देश सुदृढ़
होगा l
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