40 वर्षों से संचालित उच्च विद्यालयों को अधिग्रहण कर वेतनमान की मांग तथा लंबित अनुदान का शीघ्र हो भुगतान
40 वर्षों से संचालित उच्च विद्यालयों को अधिग्रहण कर वेतनमान की मांग तथा लंबित अनुदान का शीघ्र हो भुगतान
पटना (बिहार) प्रदेश में कुल 715 वित्त रहित एवं अनुदानित माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, जिसमें कुछ विद्यालय सरकार के द्वारा उक्त पंचायत में मध्य विद्यालयों को उच्च विद्यालयों में उत्क्रमित करने के कारण बंद के कगार पर हैं तथा जो संचालित अनुदानित माध्यमिक विद्यालय हैं, उसे बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के द्वारा जो संशोधन विनियमावली 2011 को प्रभावी की गई उसके तहत जांचोंपरांत सभी विद्यालयों का कोड तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया और उक्त विद्यालयों को इसी पंचायत में साधन विहीन उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय से टैग कर दिया गया। जो मानक अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों को पूरा करने के लिए दिया गया है। उक्त मानक बिहार के सरकारी उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय भी पूरा नही कर रही है।
यहां यह बताना आवश्यक होगा कि किसी भी माध्यमिक विद्यालय में कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं होती है लेकिन अनुदानित माध्यमिक विद्यालय में 25 कंप्यूटर के मानक को पूरा करने के लिए कहा गया है। इस तरह से गणित कक्ष, तीन प्रयोगशाला, चिकित्सा कक्ष, खेल कक्ष, कंप्यूटर कक्ष, कम्पयूटर शिक्षक, पुस्तकालयाध्यक्ष, प्रशासनिक भवन, पुस्तकालय, शारीरिक शिक्षक आदि विभिन्न मानक को पूरा करना अतिआवशयक है।
आज बिहार में ऐसे विद्यालय भी संचालित हैं जहां मात्र पांच कमरे में प्लस टू तक का विद्यालय चल रहा है। ना कंप्यूटर है, ना जमीन है, ना पर्याप्त संसाधन हैं। लेकिन वित्तरहित एवं अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों में सभी मानकों को पूरा करना अनिवार्य है। मानक पूरा नही करने वाले विद्यालयों का कोड रद्द कर दिया गया है। यह कैसा न्याय है? जबकि 40 वर्षों से संचालित इन विद्यालयों के द्वारा प्रतिवर्ष पूरे बिहार से बच्चे सफलता प्राप्त कर अच्छे-अच्छे संस्थानों में नामांकन और नौकरी प्राप्त कर रहे हैं, लेकिन उनके शिक्षकों को वर्षों से अनुदान नहीं मिल रहा है। केवल जांच पर जांच किया जा रहा है।
इधर 2015-16 तथा पूर्व के वर्षों को दिया जा रहा है, लेकिन अभी भी 2017 से 2024 तक तथा किसी किसी विद्यालयों के पूर्व के वर्षों का भी अनुदान लंबित है। यह एक यक्ष प्रश्न है, सरकार इन मांगों को पूरा करने के नाम पर वित्त रहित एवं अनुदानित विद्यालयों को बंद करना चाहती है, तो फिर इन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षाकर्मियों का क्या होगा? इस संबंध में जब बिहार के वित्त अनुदानित माध्यमिक शिक्षा कर्मी मंच के प्रदेश महासचिव एवं युवा नेता आशुतोष कुमार सिंह से जानकारी प्राप्त किया गया तो उन्होंने कहा कि सरकार सौतेलेपन कर रही है, जब जब अनुदानित विद्यालयों और सरकारी विद्यालयों में समान शिक्षा दी जा रही है तो सरकार अनुदानित शिक्षा कर्मियों के साथ सौतेलेपन का व्यवहार क्यों कर रही है। आखिर में 40 वर्षों से अनुदानित माध्यमिक विद्यालय अपेक्षित क्यों है? इस चुनाव में सभी अनुदानित शिक्षा कर्मी राजनीतिक दल के नेताओं से प्रश्न पूछेंगे और समस्या को हल करने की मांग करेंगे। एक समान शिक्षा हमारे विद्यालयों से और सरकारी विद्यालयों से बच्चे प्राप्त कर रहे हैं , तो फिर एक को अनुदान और दूसरे को वेतनमान क्यों? अनुदानित शिक्षा कर्मियों को पिछले सत्रों का सभी अनुदान का भुगतान हो । हम लोगों के विद्यालयों के कोड को पुनः बहाल किया जाए तथा सभी शिक्षा कर्मियों को नियमित वेतनमान मिले इसके लिए हम लोग संघर्षरत हैं और इस चुनाव में भी हम लोग सभी राजनीतिक दलों राजनेताओं का घेराव कर अपनी मांग को रखेंगे और आशा करेंगे की सरकार एवं विपक्ष के नेता लोग इस पर गंभीरता पूर्वक विचार करें और समाज में संचालित पर्याप्त भूमि, भवन, शिक्षक और उपस्कर वाले विद्यालयों को सरकार से अधिग्रहण करने की दिशा में पहल करें।
