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बिहार दिवस से सम्बंधित कविता
नया बिहार बनाने को
( रवींद्र कुमार रतन )
बँटवारे की पीड़ा को पी ,
अद्भुत शक्ति जगाने को ।
देखो , कौन आज आया है,
नया बिहार बनाने को ।।
चलें दिल्ली युवक बिहार के,
विशेष दर्ज़ाका हक दिलवाने।
लेने को अधिकार स्वंय का
चलें एकजुट्ता दिखलाने ।
भूखे-नंगे-शोषित जन को,
जीवन आज दिलाने को ।
देखो, कौन आज आया है,
नया बिहार बनाने को ?
मिलेगा न जब तक बिहार को
विशेष दर्ज़ा का अधिकार ।
तब तक इसके संग रहेगा ,
निश्चित ही सौतला व्यवहार ।
आलू – बालू पर आतुर है
नवल प्रभात उगाने को ।
देखो कौन आज आया है ,
नया बिहार बनाने को ।।
शीघ्र चाहिए इस बिहार को
विशेष दर्ज़ा का उपहार ।
बँटबारे का दंश झेलता
इसका तब होगा उद्धार ।
बाढ-सुखाड़ सदृश संकट में
सुन्दर महल बनाने को ।
देखो, कौन आज आया है,
नया बिहार बनाने को ?
खो कर निज अधिकार बैठना
हम बिहारियों ने ना जाना।
निज रक्षा में मर मिटने का
मर्म सभी ने है पहचाना ।
खनिज-सम्पदा के अभाव में
भी उत्थान कराने को।
देखो कौन आज आया है नया बिहार बनाने को ।
मुक्ति मिलेगी वेशेष दर्ज़ा से
चमकेगा यह नूर – से ।
भारत माता की मांग भरे
अब बिहारी – सिन्दूर से ।
संसाधन की अल्पता पर भी
नव उत्साह जगाने को ।
देखो आज कौन आया है नया बिहार बनाने को ।
अन्धकार से त्रस्त राज्य में
अभियंता अद्भुत आया है।
ले ज्योतिर्मय-मन्जूषा वह
तिमिर मिटाने को आया है।
संकल्पित है बिहारको पुष्पित
— पल्लवित कराने को ।
देखो आज कौन आया है नया बिहार बनाने को ।
आधी से ज्यादा आबादी
यहाँ विवश एवं मजबूर ।
विशेष हक मिलते बिहारमें
जनता का होगा दुख दुर ।
निज प्रदेश को ऊँच-नीच से
उपर आज उठाने को ।
देखो आज कौन आया है नया बिहार बनाने। को ।
विशेष दर्ज़ा भीख न कोई
यह तो अधिकार हमारा है।
मिले नहीं हक ऐसे तो लड़
कर लेना काम हमारा है ।
सभी समस्यायें बिहार की
अति ही शीघ्र मिटाने को।
देखो आज कौन आया है नया बिहार बनाने को।
यह मत सोचों विशेष राज्य का दर्ज़ा केवल नारा है ।
विकसित होते इस बिहारमें
समझौता न गंवारा है ।
आया यह बिगडे बिहार का
गौरव आज बढाने को ।
देखो आज कौन आया है नया। बिहार बनाने। को ।
हक के लिए व्यग्र मन मेरा
है बिहार भी अंग तुम्हारा।
मेरी स्मिति में तेरी स्मिति,
मुझको सर्जन- प्रलय तुम्हारा।
अब सुषुप्त युवकों को आये
वे तो आज जगाने को ।
देखो आज कौन आया है नया बिहार। बनाने को ।
हर ओर प्रगति-हित बिहार को
मिले स्थान विशेष दर्ज़ा का ।
भूखे नंगे शोषित जन में
भरे शक्ति नूतन चर्चा का ।
जाति धर्म से रहित सर्वथा
मुक्त बिहार बनाने को ।
देखो ,कौन आज आया है
नया बिहार बनाने का ।
रवींद्र कुमार रतन
सेनानी सदन,सुभाष नगर
म0 न0 30,हाजीपुर,बिहर
समाप्त