गोरौल क्षेत्र के मस्जिदों में अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई.
रिपोर्ट जाहिद वारसी ।
मजहबे इस्लाम में सबसे अफजल महीना रमजान का महिना माना गया है . इसी महीने में कुरान नाजिल हुआ था. इस महिने में मुसलमान पुरे एक महिना भुखे प्यासे रह कर रोजा रखते हैं अल्लाह के रजा के लिए , इस महिने के इबादत का शबाब आम महिनों से 70 गुना ज्यादा मिलता है. रमजान महिने में पड़ने वाले आखिरी जुमे को अलविदा जुमा कहा जाता है. क्षेत्र के सभी मुसलमान भाई नहा धोकर पाक साफ कपड़े पहन कर अपने अपने गांव की मस्जिदों में शुक्रवार को अलविदा नमाज अदा की . इस मौके पर मस्जिद के इमाम नसीम अहमद, ने अपने खुतबे में मौजूद लोगों से कहा कि ईद की नमाज अदा करने से पहले फीतरे का पैसा गरीब मजबूर बेवा यतिम को अदा कर देना चाहिए. फीतरे का पैसा कम से कम 65 रुपया अदा करना है. वैसे फीतरे का पैसा निकालने का सही तरीका है कि एक आदमी भड़ पेट अच्छा खाना खाने का जो पैसा होता है उतना ही पैसा फीतरे का होना चाहिए. अपने दौलत का ढाई प्रतिशत जकात देना है. गरीब मिसकिन को कपड़े से भी मदद करना चाहिए. क्षेत्र के हरशेर, इनायतनगर, भटौलीया, गुलजार बाग, हुसेना, इस्लामपुर, पोझा सहित सभी गांवों में अलविदा जुमा की नमाज अदा की गई. इस मौके पर देश में अमन-चैन कायम रहे इसके लिए दुआ मांगी गयी.