ताजपुर / समस्तीपुर : – – रमजान शरीफ के महीने में आखिर अशरे में एक रात है जिसका नाम शबे कद्र है जो हजार महीनों से भी बेहतर है कुरान पाक में अल्लाह ताला इरशाद फरमाया के शबे कादर हजार मीना से बेहतर है उसमें बेशुमार फरिश्ते यहां तक की हजरत जिब्रील अलैहिस सलाम भी जमीन पर उतरते हैं और अल्लाह की नेक बंदों से मुलाकात दुआएं करते हैं रमजान शरीफ की 21वीं रात 23 वि रात 25 वी रात 27 वी रात और 29वीं रात में से कोई एक रात शबएकदर है इस रात की कद्र करने की तौफीक अल्लाह ताला अपने उन बंदों को देते हैं जो अल्लाह से मगफिरत चाहे इन खयालात का इजहार जेपीएनस हाई स्कूल नरहन के प्राचार्य मौलाना मोहम्मद अमानुल्लाह शम्सी ने दी है उन्होंने फरमाया की शबे कद्र की कदर करना चाहिए इसलिए कि यह माहे रमजान में एक ही मर्तबा आता है और रमजान साल में एक मर्तबा आता है न जाने अगले साल का रमजान किसी को नसीब हो ना हो इसको गनीमत समझते हुए इस रात में इबादत तिलावत और मगफिरत की दुआ करनी चाहिए कुरान ए करीम इसी शबे कद्र में नाजिल हुआ है इसलिए कुरान में इरशाद फरमाया है इना एंजल ना हो फि लैलतुल कदर अल्लाह कुरान को शबे कद्र में नाजिल किया और शब ए कद्र हजार महीनों से बेहतर है इसलिए मौके को गनीमत समझते हुए इस रात की कद्र करते हुए इसमें इबादत तिलावत खूब से खूब करने की तौफीक होनी चाहिए अल्लाह ताला हमको इस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए आमीन ।