ईद पुजा, प्राथना, त्याग और आपसी भाईचारे का संदेश देता है/ मौलाना अकबर रजा
वैशाली: चेहरा कलां प्रखंड अंतर्गत बड़ी ईदगाह जलालपुर 8 बजे, चैनपुर 7 -15 बजे, अबाबकरपुर बड़ी ईदगाह 8 बजे , छौराही बड़ी ईदगाह 7: 30 बजे , ख्वाजा चांद छपरा , करहटिया बुजुर्ग, रसूलपुर फतह सुमेरगंज, रसुलपुर दाउद , चेहरा कलां , सराय अफजल इत्यादि ईदगाहों में 30 मिनट के अंतराल में नमाज अदा की गई इस मौके पर मौलाना अकबर रजा ने कहा कि ईद-उल-फितर मुसलमानों के लिए जश्न मनाने, प्रदर्शन करने और समृद्धि का आनंद लेने का एक तरीका है, साथ ही पूजा, प्रार्थना, त्याग, बलिदान, आपसी एकता और आध्यात्मिक प्रगति का एक साधन है। यही मुख्य अंतर है जो मुसलमानों और दुनिया के अन्य देशों के त्योहारों में पाया जाता है। भारत में भाइयों के त्योहारों पर नजर डालें तो हर त्योहार किसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति से जुड़ा नजर आएगा। लेकिन मुसलमानों की दो ईदें (ईद-उल-फितर और ईद-उल-अजहा ) अतीत में हुई किसी ऐतिहासिक घटना की याद में नहीं मनाई जातीं। रमज़ान के महीना जो पवित्रता, समानता, मेल-मिलाप और भाईचारे का महीना है। इस अवसर पर खुले मैदान में एकत्रित होकर अत्यंत क्रम एवं अनुशासन के साथ सामूहिकता का प्रदर्शन करते हुए दोहरी प्रार्थना की जाती है। और अपने समाज को भाईचारे और एकता का संदेश देने के लिए भाई-भाई के साथ-साथ मिल कर प्रेम का प्रचार प्रसार करते हैं ताकि देश वासी भी एक-दूसरे को देखकर हृदय से एक दूजे से प्रेम भाईचारा कायम रखे।
मेरी आर्जुओं की तमाहिद हो तुम। मेराचांद हो तुम मेरी ईद हो तुम ।