बैशाली गणतंत्र की जननी ही नही अपितु भगवान महावीर की जन्म- भूमि भी है । रवीन्द्र-रतन ।
बैशाली गणतंत्र की जननी ही नही अपितु भगवान महावीर की जन्म- भूमि भी है । रवीन्द्र-रतन ।
बैशाली के कुण्ड ग्राम में ,
महावीर ने जन्म लिया।
जैनधर्म का जगत में ,
घूम-घूम कर प्रचार किया।
10 अप्रैल को अहिंसा परमो धर्म के अग्रदूत भगवान महावीर का जन्म
गणतंत्र की जननी बिहार की बैशाली के कुण्ड ग्राम में हुआ था।
सम्पूर्ण भारत देश में बिहार ही ऐसी पावन – पवित्र प्रदेश कीभूमि है जहां भगवान भी आने को आतुर
रहते थे । इसी हाजीपुर में एक गज की पुकार पर भगवान विष्णु पधारे ,
बैशाली न होता तो भगवान राम जनकपुर जाते कैसे? जाते नही तो धनुष तोड़ता कौन और तोड़ता नही तो सीता कुवांरी ही रहती क्या?आमी,थावे , रजरप्पा भी माता ,के नाम से प्रसिद्धि पायी है।भगवान बुद्ध ने तो इसे अपनी कर्मस्थली ही बना लिया था ,और भगवान महावीर
की तो जन्मभूमि , कर्मभूमि एवं निर्वाणभूमि(तीनो) रही है ।हम जब इनका दर्शन का अवलोकन करते हैंतो पाते हैं कि इनका पांचो कल्याणक बिहार में ही हुआ है,अत:
बिहार में भगवान महावीर के जन्मोत्सव का पूरे भारतवर्ष के लिए बड़ा ही महत्वपूर्ण है। इनका स्नेह से सुरभित संदेश यह है कि
‘ प्राणी मात्र से प्रेम करो ,जियो और जीने दो ‘ सभी धर्मो का सार तत्व
निकल कर आता है:-‘ मत करो जीव संहार ‘ इन संदेशो को हमे जन -जन तक पहुंचाना ही उनके प्रति सच्ची
श्रद्धा निवेदित करनी होगी ।
भगवान महावीर जैनधर्म के 24 वें तीर्थंकर के रुप में एक ऐसी महान हस्ती के रुप में पदार्पण किए कि इनके उपदेश आज के जटिल और
तेजी से बदलते विश्व में भी प्रासंगिक है। इतिहास बताता हैकि
599 ईसा पूर्व ,वर्तमान बिहार में जन्मे महावीर ने अपने जीवन और
दर्शन से मानवता को एक ऐसी राह दिखाने का प्रयास किया जो हिंसा ,असमानता , और पर्यावरण
संकट जैसी आधुनिक चुनौतियों का
जबाब देती है। हम देखते हैकि उनके संदेश कठोर परन्तु करुणामय जीवन शैली पर आधारित है,जो आज के समाज के लिए प्रेरणास्रोत का काम करती है।
‘ जैनधर्म-संदेश सुनने से भगवन-
प्रिय हो जाता है इन्सान ।
भारतीय संस्कृति का सूरज
हैं ये महावीर भगवान ।
आज शान्ति पूर्ण ,उन्नत एवं संतुलित
समाज के निर्माण के लिए भगवान महावीर के बताए रास्ते पर चलना जरूरी है। जीवन को सार्थक और सफल बनाने के लिए इनकी तरह गुणात्मकता को जन-जन में स्थापित करना होगा। उनके उपदेशों को कोरा कागज न बनाएं अपितु उन्हे अपने जीवन का हिस्सा बनाए, अपने जीवन शैली में ढालें।भगवान
महावीर एक युग प्रवर्तक कालजयी
महापुरुष थे।उन्होने एक क्रान्ति द्रष्टा के रुप में मानव जाति के ह्रदय
में नवीन चेतना का संचार करने आए थे। वे आज भी भारतीय संस्कृति के सूरज के रुप में दे दिप्यमान है।
भगवान की तरह विष्णु ने
लिया कुण्ड ग्राम में अवतार ।
जिससे विश्व में शांति और
नर- नारी का हुआ उद्धार ।
इस प्रकार हम पाते हैं कि भगवान महावीर का संदेश आधुनिक
विश्व में शांति,स्नेह , सौहाद्र,समानता
और नैतिकता के साथ-साथ जो भारत को विश्व गुरु बनाने का मार्ग
भी प्रशस्त करता है। क्यों कि महावीर के विचारों पर चिंतन ,मनन
करना अपेक्षित है। यही उनके सिद्धान्तो की सार्थकता है और इसी से हम उनके दिशा और दशा को जन – जन तक पहुंचाने की राह पर
अग्रसर हो सकते है।
फिर से विश्व – शांति का विगुल बजे
इस प्रजातंत्र की मस्ती से ।
विश्व गुरु भारत बनेगा फिर इस
बैशाली की धरती से ।।
