April 20, 2026

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हिन्दी साहित्य में वैशाली के साहित्यकारों का योगदान l. ( रवीन्द्र कुमार रतन,स्वतन्त्र – लेखन)

हिन्दी साहित्य में वैशाली के साहित्यकारों का योगदान l. ( रवीन्द्र कुमार रतन,स्वतन्त्र – लेखन)

 

मुजफ्फरपुर मंडल से अलग हो कर 1972. में, हाजीपुर अनुमंडल को वैशाली जिले का नामांकरण हुआ l
ऐसे बहुत से साहित्यकार थे जिनका कार्य क्षेत्र हाजीपुर न था, मगर वे हाजीपुर , वैशाली जिले के रहने बाले थे l जैसे डॉ श्याम नंदन किशोर,डॉ 0 अवधेशवर अरुण , डॉ महेंद्र मिश्र मधुकर ,, डॉ 0 रामप्रवेश सिंह आदि l
प्राचीन काल पर एक दृष्टि डालें तो पता चलता है कि गयाधर जी 11 वीं सदी में कायस्थ कुल में पैदा हुए l
इन्होंने चार किताबें लिखीं l 1 स्तन मयूर,2 बुद्ध कपाल, 3 योगिनी तंत्र
4 वज्र डांक तंत्र आदि l दीपांकर श्रीग्यान अवधूतिया के शिष्य केरूप में वैशाली में अवतरित हुए थे l इनकी 70 से अधिक आलेख है जिनमें 5 पुस्तकें भोटिया भाषा में उपलब्ध है l संत बुनियाद दास वैशाली जिले के महनार प्रखंड के विष्णुपुर गांव के थे । इन्होंने अपने जीवन काल में 360 पुस्तकें लिखी थी l मुरलीधर तिवारी का जन्म वैशाली जिले के माणिक पुर पकरी में हुआ था l डॉ देवेन्द्र नाथ ठाकुर. ने इन्हें बज्जिका के विद्यापति कहा था l इसी जिले के बखरा गांव के भगेलू मिंया और बनवालि कवि हुए, मगर इनकी कोई पुस्तक प्राप्त नहीं है l ठाकुर उदय नारायण सिंह मथुरा पुर. बिदुपुर के थे और इटावा के प्रेस में कार्य करते थे l जनार्दनझा जनसीडन कई पत्र पत्रिकाओं के संपादक रह चुके थे l वैद्यरत्न ब्रज बिहारी चौबे का घर हाजीपुर था, इनकी आयुर्वेद की कुछ पुस्तके प्रकाशित हैं l
गोकुलानंद वर्मा, ,लक्ष्मीनारायण सिंह साहित्यकार गोरौल के ही रहने वाले थे l
प्रो 0 उमाकांत शर्मा आज़म गढ के मगर इनका कार्य क्षेत्र हाजीपुर अस्पताल रोड में था l कपिल छवि
वैशाली जिले के बर हटिया के थे ये महज शिक्षित होते हुएभी दो पुस्तकें लिखी l जगन्नाथ प्रसाद साहू राष्ट्रीय स्तर के पुस्तकालय के संस्थापक थे ,स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ प्रसाद श्रीवास्तव ने महनार से हस्त लिखित पत्रिका ज्योतिर्मय का संपादन किया l जगदीश चंद्र माथुर आई सी येस थेl इनका कार्य क्षेत्र था वैशाली l इन्होंने ने ही वैशाली नाम को सार्थक किया ,कोणार्क,शारदीय, ओ मेरे सपने, भोर का तारा आदि
साहित्य पुष्प से इन्होंने वैशाली को
समृद्धि किया l
जगदीश प्रसाद श्रमिक, डॉ0 जयदेव
,प्रो 0 विंदु सिन्हा, डॉ 0 योगेन्द्र सिंह, डॉ 0 श्याम नंदन किशोर, श्यामा पटेल, आचार्य सारंग शास्त्री, त्रिवेणी सिंह ,ठाकुर वैद्यनाथ सिंह, आदि बहुतेरे साहित्यकार. थे l जिनके योगदानों को भुलाया नहीं जा सकता l सीता राम दीन,हरिहर. प्रसाद नूतन, महेश प्रसाद राय, भोले नाथ विमल आदि के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता l
तत्कालीन साहित्यकारों में डॉ 0 विनय कुमार, भगवान पुर , डॉ दामोदर प्रसाद महाजन टोली, डॉ 0 अवधेशवर अरुण, डॉ अमरेंद्र कुमार, डॉ 0 उमेश कुमार सिंह का योगदान साहित्यकारों के भुलाए नहीं भूल सकता l
साहित्यकार उमाकांत वर्मा,mahavir प्र0 विप्लव आदि हिन्दी – बज्जिका के वरिष्ठ कवि ग़ज़लकार थे l उमा बाबू की एक पुस्तक की भूमिका डॉ 0 नवल किशोर प्रसाद श्रीवास्तव ने लिखी तो उन्हों ने लिखा की इनकी भूमिका सोने की अंगुठी में हीरे का नग है l डॉ 0 नवल बाबू ने बहुतेरे साहित्यकार बनाये, पी एच डी कराया l दर्जनों काव्य-संग्रह, नाटक,कहानी की किताबें लिख कर हिन्दी की श्री वृद्धि में योग दान किया है l
मुनीशवर प्रसाद राय मुनीश ,डॉ राम प्रवेश सिंह ,डॉ 0 विन्ध्यवासिनी राय, डॉ 0 शाली ग्राम सिंह अशांत आदि ने श्री वृद्धि में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया l डॉ 0 हरिकृष्ण बाबू भी इसी श्रंखला के कवि थै l
अब बारी आती हैं हमलोगों की lमेरी 6 पुस्तके स्व रचित है और 10 पुस्तकों का संपादन किया हूँ l
एक bajjika काव्य-संग्रह भीलिखाl अखौरी चंद्र शेखर जी ने भी हिंदी
Bajjika को आगे बढ़ाने में अपना पूरा योगदान दिया है l ललकी किरिनेयापुस्तक इनका बहुत नाम कमाया l इनकी धर्मपत्नी सुधा ji का भी काफी योगदान है l
दरभंगा के ब्रह्मदेव कार्य, अमिताभ कुमार,मुजफ्फर पुर के शारदा चरण
, उषा श्रीवास्तव आदि भी हाजीपुर से ही जाने जाते है और हाजीपुर के श्री वृद्धि में ही लगे रहते हैं lहरिनारायण हरि ,स्वo प्रफुल्ल कुमार सिंह मौन आदि का योगदान अविस्मरणीय है l डॉ 0 पूर्णिमा श्री वास्तव ,डॉ 0 प्रतिभा प्रसार का योगदान भी प्रशंसनीय है
श्री मती देवकी सिन्हा के ब्याह गीत का संपादन akhauri चंद शेखर एवं सुधा जी ने किया l
सुधांशु चक्रवर्ती,डॉ 0 सतीश चंद्र
भगत जी उमेश निराला जी ने भी साहित्य की विविध विधाओं में काम किया है, डॉ 0भगत जी ने बाल साहित्य पर काफी कुछ काम किया है l
महेंद्र प्रियदर्शी, मेदनी कुमार , संजय शांडिल्य ,राकेश जी, वीर भूषण,मनी भूषण अकेला, वीर मनी राय,हरि विलास राय जी,डॉ 0. शत्रुघ्न राय शशांक shambhu शरण मिश्र, हरि विलास राय ,
साधना कृष्णा आदि का कार्य भी हिंदी bajjika साहित्य के श्री वृद्धि में सराहनीय हैं l देसरी के विपिन चंद्र विप्लवी ने पटेल सेवा सदन के तहत कई पुस्तकों का सम्पादन कर साहित्य में अपना योग दान किया है राम नरेश शर्मा ,
और डॉ विद्या चौधरी भी पटना में रहते हुए हाजीपुर की ही जानी जाती है l Bajjika में इनका बड़ा योगदान है l अश्वनी आलोक ji का भी काफी योगदान है l
इस प्रकार हम देखते हैं कि आज भी वैशाली साहित्यकारों से भरा पड़ा है नवल बाबू की बज्जिका में नवल रामायण और मेरी प्रकाशित 9स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ नाथ जी के जन्म शताब्दी ग्रंथ की सराहना हो रही है l जिसका नाम ‘स्वतंत्र वीर अभिवंदन ग्रंथ ‘है l

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