April 17, 2026

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1971 में भी गौसपुर बरियारपुर के शिवनंदन प्रसाद सिंह ने वतन के लिए दी थी शहादत

1971 में भी गौसपुर बरियारपुर के शिवनंदन प्रसाद सिंह ने वतन के लिए दी थी शहादत
भारत-पाक युद्ध में कश्मीर की सरहद पर वतन की रक्षा के लिए खाई थी गोली, शहादत के लिए गौसपुर बरियारपुर पूर्व से ही रहा है चर्चित
महुआ। रेणु सिंह

महुआ अनुमंडल के राजापाकर प्रखंड अंतर्गत गौसपुर बरियारपुर गांव पूर्व से ही वतन की खातिर शहादत देने के लिए चर्चित रहा है। यहां गांव के नंदकिशोर सिंह के पुत्र 30 वर्षीय कुंदन कुमार सिंह की शहादत ने अतीत को उजागर करते हुए सिद्ध कर दिया है कि यह गांव वतन के लिए शहादत देने में पूर्व से ही चर्चित रहा है।
बुधवार को गांव में शहीद कुंदन का पार्थिव शरीर आने के बाद 1971 में भारत पाक युद्ध में शहीद हुए उक्त गांव बरियारपुर बुजुर्ग निवासी शिवनंदन प्रसाद सिंह की चर्चा जोर होने लगी। गांव के उमेश सिंह, नरेश सिंह, गणेश सिंह आदि बताते हैं कि 1971 के भारत-पाक युद्ध में शिवनंदन प्रसाद सिंह देश के खातिर लड़ते हुए शहीद हो गए थे। उसे समय भी वतन की खातिर अपनी जान को न्योछावर करने वाले शिवनंदन सिंह कि शहादत पर लोग गौरवान्वित हुए थे। लोगों का कहना है कि जो वतन की खातिर अपनी जान को न्योछावर करते हैं। वह शहीद होकर अमर होते हैं और उनकी कीर्ति को लोग जन्म जन्मांतर तक याद रखते हैं। गौसपुर बरियारपुर गांव के हर लोग युवक युवतियां, किशोर किशोरियां अपने आप में स्वाभिमान महसूस कर रहे थे। उनके गांव के वीर सपूत कुंदन कुमार सिंह ने अतीत को एक बार फिर यादगार बनाते हुए ताजा कर दिया है।
*हम भी बनेंगे कुंदन*
अरुणाचल में आर्मी पोस्ट पर ड्यूटी में तैनात कुंदन कुमार सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार को की सुबह गांवलाया गया। जहां उनकी अंतिम दर्शन के लिए पूरा इलाका उमड़ पड़ा और तिरंगा झंडा से गांव ही नहीं पूरा क्षेत्र पट गया। हर युवा और बच्चे शहीद कुंदन अमर रहे के नारे के साथ भारत माता की जयकारे करने के साथ शरहद की रक्षा के लिए हम भी कुंदन हैं यह कहने लगे। हर लोग हाथ में तिरंगा लिए कुंदन को सैल्यूट कर रहे थे। उनकी अंतिम दर्शन के लिए भीड़ जो उमड़ी। वह गांव के लिए एक बहुत बड़ा गवाह है। उनकी अंतिम यात्रा में लोगों का सैलाब उमड़ पड़ा। कुंदन को शहीद होने पर पिता नंदकिशोर सिंह, माता रिंकू देवी, पत्नी प्रियंका सिंह को दुख के साथ-साथ गर्व भी है कि उन्होंने देश के लिए शहादत दी है। कुंदन को दो छोटे पुत्र हैं, जिसे उसे दादा देश के लिए भेजने की तैयारी करेंगे।
*”लेते जनम लाखों जगत में कौन किसे याद रख पाता है, कर्मवीर कहलाता वही जो वक्त से सीने पे गोली खा अमिट छाप छोड़ जाता है”*

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