जन सुराज में टिकट बंटवारे पर बड़ा विवाद – इरफान जामियावाला का तीखा बयान
जन सुराज में टिकट बंटवारे पर बड़ा विवाद – इरफान जामियावाला का तीखा बयान
बिहार के वरिष्ठ समाजसेवी, लेखक और पसमांदा मुस्लिमों की आवाज़ इरफान अली जामियावाला ने जन सुराज के टिकट वितरण पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि “जन सुराज अब वही गलती दोहरा रहा है जो बाकी पार्टियाँ सालों से करती आई हैं — मुस्लिम और खासकर पसमांदा समाज को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करना।”
उन्होंने कहा कि “मुख्य रूप से मुस्लिम टिकट बंटवारे के बाद जन सुराज की स्थिति भी वही हो गई, जो दूसरी राजनीतिक पार्टियों में है। टिकट बंटवारे को लेकर मेरी भी नाराजगी है ही, दुर्भाग्यपूर्ण रूप से जन सुराज को जो समर्थन मिल रहा था, उसमें 80% की गिरावट भी आ गई है।”
इरफान जामियावाला ने प्रशांत किशोर की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि “जन सुराज की कथनी और करनी में बहुत बड़ा अंतर है। प्रशांत किशोर की अगुवाई में जन सुराज एक ‘वन मैन शो’ बनकर रह गया है। बिहार के लोगों ने जो भरोसा और विश्वास जन सुराज में जताया था, वह उनकी टीम की कमियों और खामियों के कारण तेजी से कम होता चला गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि “प्रशांत किशोर जी जिस तेजी से ऊपर बढ़े, उसी दुगनी तेजी से नीचे चले आए हैं। मैंने और मेरी टीम ने मिलकर जब उनसे बात की थी, तब उन्होंने स्पष्ट कहा था कि जनसंख्या अनुपात में सीट दी जाएगी। यानी अगर मुसलमान 20% हैं, तो 42 सीटें दी जाएंगी। पर अफसोस — न गया के आरिफ मास्टर को टिकट मिला, न तारिक़ अनवर को।”
इरफान जामियावाला ने कहा कि अब जन सुराज “ना जन का रहा और ना सुराज का”, क्योंकि जन सुराज के पुराने और ईमानदार कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर दिया गया है।
जन सुराज के प्रमुख पुराने पदाधिकारी जिनकी भूमिका अब हाशिए पर है:
1. आरिफ रज़ा (गया) – वरिष्ठ पसमांदा नेता और जन सुराज के प्रारंभिक संगठन संयोजक
2. तारिक़ अनवर (किशनगंज) – शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रभारी
3. नसीम अहमद (हाजीपुर) – अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के संयोजक
4. शकील रहमानी (सीवान) – युवा मंच प्रभारी
5. साजिद हुसैन (दरभंगा) – जन संवाद समिति सदस्य
6. फैज़ान खान (मुजफ्फरपुर) – आईटी और मीडिया प्रकोष्ठ सदस्य
7. आरिफ मास्टर (गया) – पसमांदा मुस्लिमों की मज़बूत आवाज़
इरफान जामियावाला का स्पष्ट संदेश:
“प्रशांत किशोर अब मुसलमानों को बेवकूफ बनाना छोड़ दें, क्योंकि ये 1960 नहीं बल्कि 2025 है। बिहार का आम मुसलमान अब जागरूक है और वह अब वादों के बजाय अपने हिस्से की भागीदारी मांगता है।”
उन्होंने कहा कि बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव अब महागठबंधन और एनडीए के बीच सिमट चुका है, और जन सुराज अब “कोई फैक्टर नहीं रहा”।
अंत में उन्होंने कहा
“बेईमानी की मानसिकता से ईमानदारी की जंग नहीं जीती जाती। बिहार के लोग अब बोल-बच्चन की राजनीति को अच्छी तरह पहचानते हैं।”
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