मधुबनी प्रशिक्षित डॉक्टरों और बेहतर व्यवस्था से एनीमिया नियंत्रण को मिलेगी मजबूती
मधुबनी प्रशिक्षित डॉक्टरों और बेहतर व्यवस्था से एनीमिया नियंत्रण को मिलेगी मजबूती
आयरन की कमी दूर करने में कारगर एफसीएम थेरेपी मधुबनी जिले में सुविधा शुरू
मधुबनी संवाददाता मोहम्मद सलीम आज़ाद
मधुबनी जिले में एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए एफसीएम थेरेपी आयरन सुक्रोज थेरेपी की शुरुआत की गई इस पहल का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने वर्चुअल माध्यम से किया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं किशोरियों एवं एनीमिया से ग्रसित मरीजों के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होगा
आयरन की कमी दूर करने में कारगर एफसीएम थेरेपी जिले में सुविधा शुरू
सिविल सर्जन डॉ हरेंद्र कुमार ने कहा कि एनीमिया जिले में एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या है, जो खासकर महिलाओं और बच्चों को प्रभावित करती है एनीमिया के कारण कमजोरी, थकान, शारीरिक विकास में बाधा और गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का खतरा बढ़ जाता है। एफसीएम थेरेपी के माध्यम से गंभीर एनीमिया के मरीजों को शीघ्र और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि एफसीएम थेरेपी एक आधुनिक और प्रभावी तकनीक है, जिसके जरिए आयरन की कमी को तेजी से पूरा किया जा सकता है। यह थेरेपी खासकर उन मरीजों के लिए उपयोगी है, जिन्हें सामान्य आयरन की गोलियों या सिरप से पर्याप्त लाभ नहीं मिल पाता। इस पहल के तहत जिले के विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों में प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा मरीजों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। प्रथम चरण में यह सुविधा सदर अस्पताल मधुबनी में की गई है जिसके लिए राज्य स्वास्थ्य समिति ने 3066 वायल दवा उपलब्ध की कराई गई है
प्रशिक्षित डॉक्टरों और बेहतर व्यवस्था से एनीमिया नियंत्रण को मिलेगी मजबूती:
सिविल सर्जन ने बताया कि इस कार्यक्रम के सफल क्रियान्वयन के लिए चिकित्सक डॉक्टर ज्ञानेंद्र भारती एवं प्रसव कक्ष इंचार्ज माधुरी कुमारी को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। साथ ही, आवश्यक दवाओं और उपकरणों की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है, ताकि मरीजों को समय पर और सुरक्षित उपचार मिल सके। इस पहल के माध्यम से सरकार का लक्ष्य जिले में एनीमिया की दर को कम करना और “एनीमिया मुक्त बिहार” के उद्देश्य को साकार करना है। इसके साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि वे संतुलित आहार, नियमित जांच और समय पर उपचार के महत्व को समझ सकें
एनीमिया नियंत्रण पहल को सफल बनाने के लिए सिविल सर्जन की अपील:
कार्यक्रम के अंत में सिविल सर्जन ने सभी स्वास्थ्यकर्मियों से अपील की कि वे इस पहल को सफल बनाने में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें और अधिक से अधिक लोगों तक इस सुविधा का लाभ पहुंचाएं। यह पहल निश्चित रूप से जिले को एनीमिया मुक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी
क्या कहते हैं राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े
राष्ट्रीय स्वास्थ्य सर्वेक्षण 5 (2019-20) के अनुसार मधुबनी जिले में 6 माह से 59 वर्ष के 64.2% शहरी क्षेत्र के एवं ग्रामीण क्षेत्र के 68.3% कुल 67.1% बच्चे एनीमिया से ग्रसित हैं नॉनप्रेगनेंट 15 से 49 वर्ष की शहरी क्षेत्र के 54.1% एवं ग्रामीण क्षेत्र के 58.7% कुल 57. 2%महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं वही है 15 से 49 वर्ष के गर्भवती महिला शहरी क्षेत्र 45.7%, ग्रामीण क्षेत्र के 54.3%, कुल 52.2% एनेमिया से ग्रसित हैं
मौके पर सिविल सर्जन डॉक्टर हरेंद्र कुमार, जिला कार्यक्रम प्रबंधक पंकज मिश्रा, अस्पताल प्रबंधक अब्दुल मजीद, पिरामल फाउंडेशन के धीरज सिंह सहित अन्य कर्मी भी उपस्थित थे
