April 22, 2026

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आयरन सुक्रोज पर नर्सों का होगा प्रशिक्षण/रिपोर्ट नसीम रब्बानी

आयरन सुक्रोज पर नर्सों का होगा प्रशिक्षण/रिपोर्ट नसीम रब्बानी

– जिला व अनुमंडलीय अस्पताल, सीएससी, पीएचसी के मैटरनिटी इकाई एएनसी ओपीडी की नर्स होंगी शामिल

-राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मातृत्व स्वास्थ्य ने पत्र लिखकर सिविल सर्जन को दिया निर्देश

-एनीमिया से ग्रसित महिलाओं को दी जाती है आयरन सुक्रोज

-गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को दूर कर रहा है ‘आयरन सुक्रोज’

वैशाली, 9 अगस्त।
प्रसव के दौरान प्रसूता एवं नवजात को किसी प्रकार की परेशानी का खतरा गर्भावस्था के दौरान बेहतर स्वास्थ प्रबंधन पर निर्भर करता है। वहीं, गर्भावस्था में बेहतर शिशु विकास एवं प्रसव के दौरान होने वाली रक्तस्राव  के प्रबंधन के लिए महिलाओं में पर्याप्त मात्रा में खून होना आवश्यक होता है। ऐसे में एनीमिया प्रबंधन के लिए प्रसव पूर्व जांच के प्रति महिलाओं की जागरूकता ना सिर्फ एनीमिया रोकथाम में सहायक होती है, बल्कि सुरक्षित मातृत्व की आधारशिला भी तैयार करती है। इसलिए गर्भावस्था में एनीमिया प्रबंधन बहुत जरूरी होता है। गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में खून की कमी उनके व उनके बच्चे के लिए खतरे की घंटी है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं में खून की कमी को पूरा करने के लिए गर्भवती महिलाओं को आयरन और कैल्शसयम की दवाओं के बाद अब आयरन सुक्रोज इंजेक्शन से गर्भवती महिलाओं में खून की पूर्ति करने की योजना बनाई गई है। इसी संदर्भ में राज्य कार्यक्रम प्रबंधक मातृत्व स्वास्थ्य डॉ सरिता ने पत्र लिखकर सिविल सर्जन को निर्देश दिया है कि आयरन सुक्रोज पर जिला अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी के मैटरनिटी इकाई एएनसी ओपीडी, लेबर रूम, ओटी में पदस्थापित नर्सों का प्रशिक्षण कराया जाए। जो गर्भवती महिलाओं की जांच करती हैं।
रक्तअल्पता से ग्रसित महिलाओं को दिया जाता है आयरन सुक्रोज :
एनिमिया की  पहचान हीमोग्लोबीन लेबल जांच करने के बाद की जाती है। इसे तीन भागों में बांटा गया है। पहला हीमोग्लोबीन लेवल 10 ग्राम से ज्यादा है तो एनीमिया नहीं माना जाता है। हीमोग्लोबीन 7 ग्राम से 10 ग्राम होता है उसे मॉडरेट कहते हैं। यदि हीमोग्लोबीन 7 ग्राम से नीचे है तो उसे सीवियर एनीमिया माना जाता है।  हीमोग्लोबीन 7 ग्राम से 10 ग्राम के बीच रहता है तो उस महिला को आयरन सुक्रोज का इंजेक्शन दिया जाता है। गर्भधारण के तीन महीने के बाद महिला को आयरन सुक्रोज दिया जाता है।
एनीमिया को दूर करने के लिए दिया जाता है आयरन सुक्रोज:
सिविल सर्जन डॉ प्रमोद कुमार सिंह ने बताया शरीर में खून की कमी होना गंभीर स्थिति है और यह गर्भावस्था में तो और भी विकट हो सकती है। इसलिए विभाग ने जच्चा-बच्चा को स्वास्थ्य लाभ देने के लिए यह हल निकाला है। शरीर को हेल्दी और फिट रहने के लिए अन्य पोषक तत्वों के साथ-साथ आयरन की भी जरूरत होती है। आयरन ही हमारे शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का निर्माण करता है। ये कोशिकाएं ही शरीर में हीमोग्लोबिन बनाने का काम करती हैं। हीमोग्लोबिन फेफड़ों से ऑक्सीजन लेकर रक्त में आक्सीजन पहुंचाता है। इसलिए आयरन की कमी से शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है और हीमोग्लोबिन कम होने से शरीर में आक्सीजन की कमी होने लगती है। इसकी वजह से कमजोरी और थकान महसूस होती है, इसी स्थिति को एनीमिया कहते हैं।

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