ज्योति की ज्योत से पोषण सहित शिक्षा का भी अंधियारा मिटने लगा – आंगनबाड़ी सेविका पोषण के साथ लोगों को शिक्षा का भी बताती हैं महत्व – हलवा,पुलाव और अण्डों से भरती हैं थाली
ज्योति की ज्योत से पोषण सहित शिक्षा का भी अंधियारा मिटने लगा
– आंगनबाड़ी सेविका पोषण के साथ लोगों को शिक्षा का भी बताती हैं महत्व
– हलवा,पुलाव और अण्डों से भरती हैं थाली
मोतिहारी, 23 मार्च ।
ज्योति देवी। एक साधारण आंगनबाड़ी सेविका। हर दिन की तरह अपने वार्ड नंबर 10 में आती है, पर इनके काम ने जो ज्योत फैलायी है इससे पोषण सहित शिक्षा का भी अंधियारा मिटने लगा है। इनकी कार्यकुशलता की निशानी कोई बोल कर नहीं सुनाता। वह इनके काम से यहां के बच्चों के मोहक मुस्कान में दिखती है। इनकी काम की सराहना इनके ही नहीं दूसरे पोषक क्षेत्र की महिलाएं भी करती हैं। वार्ड 10 पोषक क्षेत्र की प्रीति कुमारी कहती हैं कि आंगनबाड़ी केंद्र के खुलते ही गांव के सारे अभिभावक अपने बच्चों को यहां लेकर आ जाते हैं। जब हमारे बच्चों का टीकाकरण, पोषण , शब्द ज्ञान उचित होता है तो वह उसे अपनी देखरेख में करती हैं | दूसरे वार्ड की महिलाएं भी ज्योति की तारीफ करती हैं । मैं देखती हूं कि वह आंगनबाड़ी केंद्र की खुद साफ-सफाई के बाद बच्चों को पढ़ाती भी हैं। वहीं पोषण से भरा भोजन हमारे बच्चों को भी खूब भाता है।
पोषण पर अमल करना सिखाया
ज्योति देवी ने बताया जब उन्होंने अपने पोषक क्षेत्र में काम करना शुरू किया तो लोगों के पास पोषण के बारे जानकारी तो थी पर उसे अमल नहीं करते थे। मेरा कर्तव्य था कि लोग अपनी जानकारी को अमल में भी लाएं। मैंने इसकी कवायद उसी वक्त से शुरू कर दी जब मैंने इसे सेवा के रूप में चुना। वहीं दूसरी चुनौती थी बच्चों की शिक्षा। तीन साल से 6 साल तक के बच्चों के पोषण के साथ शिक्षा पर भी ध्यान दिया। जब बच्चे घरों में अपने शब्द ज्ञान को बताते हैं तो उनके अभिभावकों को बड़ी खुशी होती है। अब मेरे केंद्र पर दृश्य यह है कि अभिभावक अपने बच्चों को लेकर 9 बजे पहुंच जाते हैं। केंद्र खुलने का इंतजार करते हैं। अभी केंद्र में कुल 40 बच्चों का नामांकन है। मैंने तीन साल की उम्र में अपने बच्चे का नामांकन भी यहीं कराया था। अब वह यहां से पास आउट हो चुका है।
हलवा,पुलाव और अण्डों से भरती हैं थाली
ज्योति देवी के अनुसार बच्चों के संपूर्ण पोषण का ध्यान रखा जाता है। उन्हें यहां संपूर्ण पोषण मिलता है। हर दिन अलग-अलग मैन्यू के अनुसार बच्चों को आहार दी जाती है। बच्चे भी इससे खुश रहते हैं। यहां हलवा से लेकर पुलाव और अंडा भी बच्चों की थाली में होते हैं। ज्योति बताती हैं वह स्तनपान कराने वाली महिलाओं को भी दूध पिलाने का आग्रह करती हैं। समय पर केंद्र में अन्नप्राशन और गोदभराई का कार्य करती हूं। लॉकडाउन के दौरान जून माह तक नामांकित बच्चों के अभिभावकों के बीच राशन का वितरण किया।
देती हैं स्वच्छता का संदेश
सेविका ज्योति देवी अपने आंगनबाड़ी केंद्र के क्षेत्रों के अलावा वार्ड में घूमकर बच्चों, महिलाओं के बीच जाकर स्वच्छता का संदेश पहुंचाती हैं। बच्चों को कोरोना काल मे भोजन के पूर्व और बाद में साबुन से हाथ साफ कर बीमारियों से बचने का सलाह देती रहीं हैं ।
लॉकडाउन के दौरान फोन कर पूछती थी हाल
सेविका ज्योति देवी ने बताया कि लॉकडाउन के दौरान गृह भ्रमण नहीं हो पा रहा था। मैंने अपने केंद्र में नामांकित बच्चों के हर अभिभावक से मोबाइल नंबर लिया था। पूरे लॉकडाउन के दौरान मैंने बच्चों के अभिभावक, गर्भवती महिलाओं और बच्चों का फोन पर हाल-चाल लेती रही। संपर्क रहने से मेरा डेटा भी अपडेट रहा तथा नये गर्भवती महिलाओं की जानकारी भी मिलती रही। अभी मेरे पोषक क्षेत्र में गर्भवती, प्रसूति तथा तीन से छह माह के कई बच्चे नजर में हैं। अभी भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करा टीकाकरण के सत्र का आयोजन करती हूं। जिनमें आंगनबाड़ी पर्यवेक्षक और वार्ड के प्रमुख लोगों का भी योगदान रहता है ।
