जीवन की अंतिम सांसे गिन रहे महुआ के वरिष्ठ पत्रकार गुरुदयाल शास्त्री ।। रिपोर्ट सुधीर मालाकार । महुआ (वैशाली )जिले के महुआ अनुमंडल क्षेत्र में तीन दशक तक पत्रकारिता जगत के स्तंभ कहे जाने वाले गुरुदयाल शास्त्री आज अपने जीवन की अंतिम पड़ाव पर पहुंच कर एक एक सांसे गिन रहे हैं। बताते चलें ,जिस वक्त महुआ क्षेत्र में पत्रकारिता करना कोई नहीं चाहता था उस वक्त श्री शास्त्री जी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में अपने लेखन के माध्यम से पाठकों को जगाते रहे ।लंबे समय तक दैनिक “आज “के महुआ से पत्रकार रहे ,जो आज भी उनकी लेखनी लोगों को हमेशा उनकी यादें बनाए हुए है। जबकि आज की पत्रकारिता चाटुकारिता बनकर रह गई है ,वही निर्विकार भाव से सामाजिक समस्याओं, लोगों की बातें अपने पत्रकारिता के माध्यम से हमेशा उठाते रहते हैं । वे मुजफ्फरपुर जिले के कांटी स्थित उच्च माध्यमिक विद्यालय में संस्कृत के प्राध्यापक के रूप में कार्य कर अवकाश प्राप्त कर चुके हैं।बताते चलें कि गुरुदयाल शास्त्री पिछले कई महीनों से किडनी संबंधी बीमारी से ग्रसित होकर डायलिसिस के सहारे अपने जीवन को जी रहे हैं ।हाल में बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने इन्हें घर पर ले जाने की सलाह दी । इसका अर्थ इनकी जीवन की सांसे पूरी हो चुकी है ।आज दोपहर दिल्ली से सीधे एंबुलेंस के जरिए महुआ अनुमंडल अस्पताल लाया गया, स्थानीय विधायक डॉ मुकेश रोशन के साथ-साथ उनके बड़े भाई जदयू के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र पासवान शास्त्री ,पत्रकार सुनील कुमार सिंह ,दिलीप कुमार, सुधीर मालाकार, विपिन कुमार, नसीम रब्बानी सहित सैकड़ों की संख्या में उनके चाहने वाले उपस्थिति थे। सर्वप्रथम डॉक्टरों ने कोविड-19 की जांच कर रिपोर्ट आने तक प्रतीक्षा करने की बात कही, साथ ही उन्हें घर पर ले जाने की सलाह दी ।उनके पुत्र राजेश कुमार एवं उनके तमाम परिजनों ने अस्पताल में न रखकर घर पर ले जाना उचित समझा । उन्हें समसपुरा पंचायत के कुशहर खास पैतृक निवास स्थान पर ले जाया गया, जहां उनकी स्थिति नाजुक बताई जाती है ।हम सभी पत्रकारिता जगत के लोग ईश्वर से कामना करते हैं कि वे स्वस्थ हो ,ताकि उनकी स्नेह हम सब पर बनी रहे।