बेमौसम बूंदाबांदी ने आलू और पान उत्पादक किसानों में बढ़ाई चिंता महुआ। नवनीत कुमार बेमौसम फिर हुई बूंदाबांदी से आलू और पान उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है। बूंदाबांदी हुई जिसके बाद आलू उत्पादकों ने फसल पर एक बार फिर छिड़काव करना शुरू कर दिया है। बताया गया कि अगर फफूंद नाशक दवा का छिड़काव नहीं होता है तो फसल बर्बाद हो जाएगी और किसान कहीं के नहीं रहेंगे। आलू और पान के लिए पाला, कोहरा और बारिश कहर के समान माना गया है। बेमौसम बारिश होने से किसान ज्यादा चिंतित है। यहां किसानों ने बताया कि आलू के पौधे कोमल होते हैं। उस पर बारिश के पानी पड़ने से गलका रोग लग जाता है और वह फसल खराब हो जाती है। आलू के पौधे गलका रोग से खराब हो जाने के बाद उसमें फल नहीं लगते हैं। जिससे किसानों की लगाई गई पूंजी भी समाप्त हो जाती है। किसानों ने बताया कि अगर मौके पर फफूंद नाशक दवा का छिड़काव नहीं करते हैं तो वह कहीं के नहीं रहेंगे। फसल खराब हो जाएगी और घर की भी पूंजी चली जाएगी। आलू उत्पादकों ने बताया कि इस बार बाढ़ और बारिश के कारण एक तो फसल देर से लगी है और बेमौसम बूंदाबांदी हो रही है। अभी आलू की फसल पूरे यौवन पर है। उसे बचाने के लिए किसान जद्दोजहद कर रहे हैं। किसान बताते हैं कि फफूंद नाशक दवा इंडोफिल एम-45 के साथ कीटनाशक का छिड़काव कर रहे हैं। उधर पान उत्पादको ने भी बताया कि फसल को गलका रोग से बचाने के लिए फफूंद नाशक दवा का छिड़काव कर रहे हैं। पान के पत्ते बहुत ही कोमल होते है और उसे किसान काफी मेहनत से उगाते हैं।