अंबेडकरवादी विचारधारा के नेतृत्व करने वाले लोग मनुवादी से हाथ मिलाते हुए उनके मकड़जाल में फंस गए हैं: संजय यादव
रिपोर्ट नसीम रब्बानी
हाजीपुर:-पूरे देश में बाबा साहेब भीमराव की जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जा रही है!
कार्यक्रमों से लगता है कि पूरा देश अंबेडकरवादी हो गया है परंतु इसका सच कुछ और ही बयां कर रहा है! एक तरफ पूरा देश जय जय भीम जय भीम के नारों से गूंज रहा है वहीं दूसरी ओर जय भीम के नारा लगाने वाले लोग बाबा साहब के नाम पर मार्केटिंग भी कर रहे हैं ! जैसा कि हम सभी जानते हैं कि बाबा साहब पाखंडवाद मनुवाद के खिलाफ आजीवन अपनी लड़ाई को बुलंद करते रहे! यातनाएं सही और कुर्बानियां दी बहुजन समाज को एक दिशा प्रदान किया! उनके ही प्रयासों से बहुजन समाज को बहुत सारे अधिकार मिले ! बहुजन समाज उन्हीं की प्रेरणा से संघर्ष करके अपने अधिकारों को प्राप्त किया! अंबेडकर के समकालीन जितनी उनकी आवश्यकता थी उससे कहीं ज्यादा 100 गुना ज्यादाआज उनकी आवश्यकता महसूस की जा रही है! ऐसा इसलिए हुआ कि समय के साथ-साथ बहुजन समाज के अंबेडकरवादी विचारधारा पर धूल की मोटी परत जम गई और मूल सिद्धांतों से भटक कर पुनः मनुवाद के मकड़ी जाल में उलझ गया! परिणाम स्वरूप बहुजन समाज के नौजवान बच्चे महिलाएं बूढ़े सभी मनुवाद के विचारधारा के गुलाम हो गए हैं! जिसके परिणाम स्वरूप मनुवादी ताकते फिर से गांव से लेकर देश स्तर तक शोषित वर्गों के ऊपर राज कर रही है !
100 में 90 संख्या बल होते हुए भी बहुजन समाज हाशिए पर चली गई है!
ऐसा इसलिए कि अंबेडकरवादी विचारधारा के नेतृत्व करने वाले लोग मनुवादी से हाथ मिलाते हुए उनके मकड़जाल में फंस गए हैं! एक तरफ जय भीम का नारा लगाते हैं तो दूसरी तरफ उनके घर की महिलाएं मूर्ति पूजा और यज्ञ समारोह कि कलस अपने माथे पर उठाती हैं! मनु वादियों के द्वारा आयोजित यज्ञ समारोह में चंदा उगाही करते हैं सड़क जाम करते हैं ! जय श्री राम का नारा लगाते हैं !दूसरी ओर अंबेडकर जयंती के समय जय भीम जय जय भीम करते हैं ! इस दोहरे चरित्र के कारण ही हमारे बहुजन समाज के अधिकारों को मनु वादियों के द्वारा फिर से छीना जा चुका है!सत्ता पर मनुवाद राज कर रहा है !हम इस लेख के माध्यम से पूछना चाहते हैं अंबेडकरवादी लोगों से क्या बताएंगे ? आप हाथ में बद्दी माथे पर चंदन मूर्ति पूजा यज्ञ आहुति और पाखंडवाद के सहारे बहुजन समाज को न्याय दिला सकते है! उनके अधिकारों की रक्षा हो सकती है ! बाबा साहब ने कहा था शिक्षित बनो जो शिक्षित होगा वह उपयुक्त पाखंडी और आडंबर के जाल से मुक्त होगा! यदि हमें मुक्ति मिल नहीं रही है तो निश्चित ही हमारी शिक्षा अधूरी और अनुपयोगी है ! शिक्षा का मतलब जीवन को अंधकार से प्रकाश में लाना यदि हमारे मन मस्तिष्क में अंधकार व्याप्त है और हम ज्ञानी होने का स्वांग रखते हैं यह हमारी मूर्खता मात्र है इसी मूर्खता के कारण आज फिर से हमारा समाज मनु वादियों के गुलाम हो गया है ! हम चाहेंगे देश के तमाम अंबेडकरवादी नेतृत्व करने वाले नेताओं से शिक्षित बने और शिक्षा ही आपके भ्रम को तोड़ सकता है मनु वादियों के मकड़जाल को तोड़ सकता है भ्रम की प्रतिमा का पूजा छोड़कर आस्था के भ्रम से ऊपर उठकर कबीर और बुध के शरण में जाके ही सही और सार्थक शिक्षा का अनुभूति मिल सकता है ! तभी हम शिक्षित कहलायेंगेऔर तब हमारे द्वारा किया गया संघर्ष अंबेडकरवादी सिद्धांत को सही दिशा दे सकता है! जब हम आपस में संगठित रह के मनुवादी ताकतों को फिर से हराकर पूरे देश में वंचितों को न्याय दिलाते हुए उनके अधिकार कि हम रक्षा कर सकते हैं!