मानवता की पीड़ा को महसूस करने का माध्यम है रोजा
मानवता की पीड़ा को महसूस करने का माध्यम है रोजा।
रिपोर्ट जफर अहमद। ब्यूरो रिपोर्ट सुधीर मालाकार।
सहरसा । स्टूडेंट्स इस्लामिक ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया, सहरसा ,यूनिट की ओर से एक इफ़्तार पार्टी व रमज़ान पर चर्चा कार्यक्रम का आयोजन सैक्रेड हर्ट पब्लिक स्कूल , मुहम्मद अली रोड सहरसा में किया गया । इसमें अलग- अलग प्रमुख समुदाय के लोगों की उपस्थिति से कौमी एकता का परिचय दिया।
एक ओर जहां सभी लोगों ने एक ही दस्तरख्वान पर एक साथ मिल- जुल कर प्रेम और भाईचारे की भावना से ओत- प्रोत होकर इफ़्तार किया, वहीं इफ़्तार के बाद ” रमज़ान पर चर्चा ” कार्यक्रम में भी लोगों की सक्रिय उपस्थिति रही।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि रमज़ान एक ओर जहां विश्व बंधुता और भाईचारे का संदेश देता है ,वहीं रमज़ान का मक़सद ये है कि लोगों में पवित्रता पैदा हो। लोग अपने आचार- विचार , व्यवहार और सम्पूर्ण जीवन में सदाचारी बनें, व्यक्तित्व और आत्मा को अपवित्र कर देने वाली क्रियाओं से रुकें और अपवित्र मार्ग को छोड़ कर पवित्रता को ग्रहण करें।
वक्ताओं ने जहां रोज़े, रमज़ान आदि को लेकर कई भ्रामक प्रचार की वास्तविकता भी बताई वहीं रोज़े को मानवता की पीड़ा को महसूस करने का एक माध्यम भी बताया ।
सभा में उपस्थित कई लोगों ने कार्यक्रम को लेकर अपनी प्रतिक्रिया भी दी तथा हिन्दू- मुस्लिम एकता पर बल दिया। आपसी वैमनस्य दूर कर के प्रेम और भाईचारे के साथ देश में रहने को समय की आवशयकता बताई।
कार्यक्रम में एस आई ओ, बिहार के अध्यक्ष दानियाल अकरम तथा एस आई ओ ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय सचिव मुहम्मद हफीज भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को मुहम्मद शादाब अख़्तर ( ज़िला अध्यक्ष एस आई ओ सहरसा) , शत्रुघ्न शर्मा , मीर अबू तालिब, नीरज कुमार शर्मा आदि ने संबोधित किया।
वहीं पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में एस आई ओ सहरसा के सचिव कैसर नियाज़ी, उपाध्यक्ष नज़रे उद्दीन,मोहम्मद शाहिद, साकिब अख़्तर, सद्दाम हुसैन, अल्ताफ इकबाल, तनवीर अहमद ,मेराज आलम, कलीम आलम, शाद ख़ान, ओवैस, हैदर, सिराज, सज्जन आदि का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
