April 21, 2026

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10 जुलाई से हरीशयन दोष के कारण मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा विराम

10 जुलाई से हरीशयन दोष के कारण मांगलिक कार्यों पर लग जाएगा विराम
2022 मौसम का अंतिम लग्न आज 08 जुलाई को, अब 4 महीने तक करने होंगे शुभ लग्न का इंतजार, चतुर्मास में शुभ कार्य करना माना गया है वर्जित, होते रहेंगे यज्ञ और पूजा पाठ, 4 महीने बाद कार्तिक में देव उठानी (प्रबोधिनी) एकादशी के बाद शुभ कार्यों में लगेंगे पंख
हिन्दुस्तान महुआ। नवनीत कुमार
आगामी 10 जुलाई रविवार को हरिशयनी एकादशी होगा। इसी के साथ चतुर्मास शुरू हो जाएगा और मांगलिक सहित सारे शुभ कार्यों पर विराम लग जाएंगे। मौसम के अंतिम लग्न 08 जुलाई शुक्रवार के 4 महीने बाद कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी को तुलसी विवाह के साथ मांगलिक और अन्य शुभ कार्य प्रारंभ होंगे। तब तक शहनाई की गूंज पर विराम लग जाएंगे।
गुरुवार को यहां आचार्यों ने बताया कि भगवान विष्णु आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी को योग निंद्रा में चले जाते हैं। इसी दिन से चतुर्मास शुरू हो जाता है। इधर चतुर्मास हो जाने के कारण मांगलिक सहित सारे शुभ कार्यों पर विराम लग जाते हैं। आचार्यों ने बताया कि भगवान विष्णु के निंद्रा में चले जाने के बाद शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है। देवशयनी एकादशी से हरि प्रबोधिनी एकादशी तक खासकर मांगलिक कार्य पर तो पूर्णतः विराम लग जाएंगे। हरिशयनी एकादशी पर श्रद्धालु निर्जला उपवास रख भगवान विष्णु की पूजा अर्चना करने की तैयारी में जुट गए हैं। यह पर्व विशेष फलदायक माना गया है। आचार्यों ने यह भी बताया कि स्कंदपुराण में उल्लेख के अनुसार भगवान विष्णु योगनिद्रा को आमंत्रित करते हैं और उसे अपनी आंखों में स्थापित कर लेते हैं। इस चतुर्मास में ऋषि-मुनि, संत-महात्मा भ्रमण को छोड़कर आश्रम में रहकर साधना में जुट जाते हैं। इधर वर्षा ऋतु होने से कृषक अपनी खेती में फसल की तैयारी में लग जाते हैं। इस मौसम का अंतिम लग्न 08 जुलाई शुक्रवार को होगा। उसके साथ शुभ लग्न की शहनाई की गूंज अगले चार माह तक मंद पड़ जाएगी। शादी विवाह करने वाले परिवार को अब 4 महीने तक शुभ लग्न का इंतजार करना होगा।
यज्ञ और पूजा पाठ होते रहेंगे:
चातुर्मास में यज्ञ और पूजा पाठ होते रहेंगे। आचार्यों की माने तो चतुर्मास में यज्ञ और पूजा पाठ करना लाभदायक होता है। भगवान विष्णु को शयन में जाने के बाद उनकी आराधना करने से फल की प्राप्ति होती है। सृष्टि के पालनकर्ता भगवान विष्णु को चतुर्मास में जाने के बाद पूजा-पाठ, यज्ञ आदि करना शुभकर माना गया है। इस अवधि बच्चों में विभिन्न संस्कार भी कराए जाएंगे। खासकर इस अवधि में मांगलिक कार्य करना बंद कर दिया जाता है।
शुभ सामानों की दुकानों पर छाएगी बिरानगी:
चतुर्मास शुरू हो जाने से शुभ सामानों की बिक्री पर विराम लग जाएंगे। खासकर शादी विवाह पर शुभ समान बेचने वाले दुकानदारों के सामने बंदी की मार पड़ेगी। मांगलिक कार्य बंद होने से वे 4 महीने तक बेरोजगार हो जाएंगे। यहां बुधवार को शुभ सामान बेचने वाले दुकानदारों ने बताया कि देवशयनी एकादशी हो जाने पर उनके दुकान पर बिरानगी छा जाएगी। अब 4 महीने तक वे दूसरे का अर्थ करेंगे ताकि घर परिवार चल सके। इधर टेंट शामियाना वाले, कुक वाले, खाना बनाने वाले, हलवाई, कारीगर, वर मंडप सजाने वाले, बैंड वाले, आर्केस्ट्रा ट्रॉली वाले आदि को भी बंदी की असर होगी। इधर लग्न को लेकर गुलजार हो रहे कपड़ा दुकान, रेडीमेड दुकान, परचून दुकान, गल्ला दुकान और खासकर स्वर्ण आभूषण दुकानदारों पर ग्राहकों की कमी पड़ जाएगी। शुभ लग्न में डाला दउरा बनाकर बक्शीश के तौर पर रुपए लेने वाले महादलितों के व्यवसाय पर भी असर पड़ेगा।
इस बार नवंबर में नहीं दिसंबर में शुभ लग्न:
इस बार नवंबर महीने में शुभ लग्न नहीं होगा। इस मौसम का अंतिम लग्न 08 जुलाई को होगा। इसके बाद बनारसी पंचांग के अनुसार 02 दिसंबर से शुभ लग्न आरंभ होंगे। इसके बाद लोग अपने पुत्र और पुत्रियों के मंगल कार्य कर सकेंगे। दिसंबर महीने में 02, 03, 07, 08, 09, 13, 14 और 15 को शुभ लग्न में शादियां हो सकेंगी।
प्रस्तुति नवनीत कुमार, हिंदुस्तान मीडिया, महुआ

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