स्वतंत्रता सेनानी भगवान सिंह के निधन पर शोक की लहर पैतृक गांव महुआ के कन्हौली गढ़वाल में ली अंतिम सांस, विगत 6 माह से चल रहे थे बीमार महुआ, नवनीत कुमार जेपी आंदोलन में बढ़ चढ़कर भाग लेने वाले स्वतंत्रता सेनानी महुआ के कन्हौली गढ़वाल निवासी 105 वर्षीय सीताराम सिंह उर्फ भगवान सिंह का निधन शुक्रवार की दोपहर हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही लोगों में शोक की लहर दौड़ गई और संवेदना जताने वालों का तांता लग गया। बताया जा रहा है कि स्वतंत्रता सेनानी भगवान सिंह 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन में महती भूमिका निभाई थी। वे जेपी आंदोलन में बढ़-चढ़कर भाग लिया था। साथ ही डॉ लोहिया सहित कई दिग्गजों के संपर्क में रहकर देश को आजाद कराने के लिए अंग्रेजों से लड़ते रहे। इसके लिए उन्हें गोरी सरकार की यातनाएं सहनी पड़ी और सलाखों के पीछे जाना पड़ा। मृतक अपने पीछे 2 पुत्र सुरेश कुमार सिंह और सतीश कुमार सिंह, तीन पुत्रियां शांति देवी, बबली देवी और सुधा देवी, पुत्र वधू मधु देवी, और अर्चना देवी, पुत्र कुणाल, चंदन, आदित्य और पुत्री गुड़िया, गुंजा, काजल और निक्की सहित भरा पूरा परिवार को छोड़ गए हैं। एक पुत्री बबली देवी का निधन करीब दो दशक पूर्व बीमारी से हो गई थी। उनके निधन की खबर जैसे ही सगे संबंधियों, मित्रों आदि को मिली। वे उनकी अंतिम दर्शन के लिए पहुंच गए। उनके निधन की सूचना महुआ अनुमंडल को लेकर प्रखंड स्तरीय पदाधिकारियों को दी गई। परिजनों द्वारा बताया गया कि मृतक स्वतंत्रता सेनानी का अंतिम संस्कार शनिवार को हाजीपुर गंगा गंडक संगम स्थल कोनहारा घाट पर किया जाएगा। मृतक के पुत्र सुरेश सिंह ने बताया कि उनका इलाज घर पर ही चल रहा था। इस बीच वह शुक्रवार की दोपहर अचानक अंतिम सांस ली। मालूम हो कि महुआ अनुमंडल क्षेत्र में स्वतंत्रा सेनानी की दौर में सिर्फ भगवान बाबू शेष बचे थे।