April 18, 2026

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बिहार के सरकारी विद्यालयों की उन्नति के लिए विगत 3 वर्षों से निशुल्क एवं निस्वार्थ सेवा भाव से कार्य कर रही है टीचर्स ऑफ बिहार।

बिहार के सरकारी विद्यालयों की उन्नति के लिए विगत 3 वर्षों से निशुल्क एवं निस्वार्थ सेवा भाव से कार्य कर रही है टीचर्स ऑफ बिहार।

बिहार की सबसे बड़ी प्रोफेशनल लर्निंग कम्युनिटी टीचर्स ऑफ बिहार शिक्षको द्वारा, शिक्षकों के लिए, शिक्षकों का एक ऐसा अभिनव मंच है जो शिक्षा से जुड़े सभी हिताधिकारियों के द्वारा किये जा रहे शैक्षिक प्रयासों को साझा करने, नवाचारों से सीखने और लागू करने का अवसर और पहचान प्रदान करता है। इस अभिनव मंच की कल्पना आज से तीन वर्ष पूर्व इसके फाउंडर पटना जिले के शिक्षक शिव कुमार ने की थी। आज इस मंच से लाखों शिक्षक एवं शिक्षिकाएं फेसबुक ग्रुप एवं कुटुंब ऐप एवं अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जुड़कर सीधे अपने विद्यालयों में आयोजित नवाचारी गतिविधि को साझा करते हैं। जिसमें से उत्कृष्ट फोटोज एवं विडियोज का चयन फोटो ऑफ द डे एवं ‘वीडियो ऑफ द डे’ एवं एक्टीविटी ऑफ द डे के रूप में टीम के मॉडरेटर के द्वारा ट्वीटर, लिंकडिन, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, कू ऐप पर साझा किया जाता है। टीचर्स ऑफ बिहार के मंच से जुड़े शिक्षकों की साहित्यिक रचनाओं को गद्य गुंजन, पद्य पंकज एवं ब्लॉग्स के माध्यम से वेबसाइट पर प्रकाशित की जाती है। जिससे अन्य विद्यालय के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भी लाभान्वित हो रहीं हैं। टीचर्स ऑफ बिहार के द्वारा समय समय पर शिक्षकों की शैक्षिक हितों को ध्यान में रखते हुए उच्चाधिकारियों को अपने लेट्स टॉक में आमंत्रित कर उन्हें उचित मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया जाता है। इतना ही नहीं विद्यालय में प्रतिदिन चेतना सत्र का संचालन बेहतर ढंग से हो इस हेतु प्रतिदिन सुविचार, दिवस ज्ञान, दिवस विशेष, शब्द कोष, विश्व के धरोहर, खेल कॉर्नर, रोचक तथ्य, चेतना सहित अन्य दिवस विशेष पर ज्ञान वर्धक जानकारी युक्त पोस्टर साझा किए जाते हैं। कोरोना काल में बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लास “स्कूल ऑन मोबाइल”, “लॉक डाउन में लर्निंग”, “कोडिंग सीखेगा बिहार” कार्यक्रम का संचालन किया गया। शिक्षकों के हित में मासिक पत्रिका ई मैग्जीन, बच्चों के हित में मासिक पत्रिका “बाल मंच, नन्हीं कलम से”, “अभिमत, एक कदम शिक्षा की ओर” का प्रकाशन, संडे इज फन डे, योगा, किसी खास अवसर पर क्विज का भी आयोजन टीम के द्वारा किया जाता है। वर्तमान में नई शिक्षा नीति के आलोक में विद्यालय में बैगलेस सैटरडे की कल्पना को चरितार्थ करने के लिए टीम से सभी सदस्य लगे हुए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन सारे कार्यों के लिए टीचर्स ऑफ बिहार के द्वारा किसी भी प्रकार का आर्थिक सहयोग शिक्षकों से या अन्य किसी संस्था से नहीं ली जाती है यानी सारे कार्यक्रम टीम के सदस्यों के द्वारा नि:शुल्क आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यों का प्रतिफल यह कि शिक्षक की क्षमता वर्धन के साथ-साथ देश के कई नामी-गिरामी शैक्षिक संस्थान एवं व्यक्तियों द्वारा बिहार के सरकारी विद्यालय के शिक्षकों की प्रशंसा हर मंच पर की जा रही है।
टीचर्स ऑफ बिहार के फाउंडर शिव कुमार ने कहा बिहार के शिक्षक स्वान्त: सुखाय के तर्ज पर अपनी प्रतिभा और अपने कार्यों को खुद अपने प्रयास से आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं। वह दिन दूर नहीं जब पुनः बिहार देश में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त करते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा।
इसकी जानकारी टीचर्स ऑफ बिहार के प्रवक्ता रंजेश कुमार एवं तिरहुत प्रमंडलीय मीडिया प्रभारी मो. नसीम अख़्तर ने संयुक्त रूप से दी।

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